दुर्लभ खगोलीय संयोग बना वजह
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। फागुन माह में धूमधाम से मनाए जाने वाले रंगों के पर्व को लेकर इस बार लोगों में तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चंद्रग्रहण के कारण होलिका दहन 2 मार्च, सोमवार को प्रदोष काल में किया जाएगा। दुल्हैंडी चार मार्च को मनाई जाएगी।
प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर के आचार्य मुकेश शांडिल्य ने बताया कि इस बार होली पर दुर्लभ खगोलीय संयोग बन रहा है। चंद्रग्रहण के कारण 4 मार्च, बुधवार को रंगों की होली खेली जाएगी।
फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि 2 मार्च सोमवार को सायं 5:57 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदोष काल में होलिका दहन करना शुभ माना गया है। ऐसे में सोमवार को शाम 6:15 बजे से रात 8:47 बजे तक होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा।
मंगलवार को पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल से पूर्व ही समाप्त हो रही है और उसी दिन वर्ष का पहला चंद्रग्रहण भी निर्धारित है। ग्रहण का सूतक काल सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ होगा। ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे तथा मोक्ष सायं 6:47 बजे होगा। सूतक काल में मंदिरों के पट बंद रहेंगे तथा ऐसे समय में पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, भोजन बनाना व ग्रहण करना वर्जित रहेगा। हालांकि बालक, वृद्ध और रोगग्रस्त व्यक्तियों को शास्त्रों में नियमों में शिथिलता दी गई है।