होलिका दहन को लेकर ज्योतिषाचार्यों और धर्मगुरुओं के बीच मतभेद हैं। कुछ धर्मगुरु और ज्योतिष विद्वान 22 मार्च की रात 3:45 बजे होली दहन करने को शास्त्र संगत बता रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कुछ विद्वान 23 मार्च शाम 6:30 बजे का समय अच्छा बता रहे हैं।
पंडित विनोद त्यागी के अनुसार 23 मार्च की शाम 6:30 बजे से 7:30 बजे तक होलिका दहन किया जाना चाहिए। आचार्य कौशल वत्स ने कहा कि भविष्य पुराण के अनुसार यह योग श्रेष्ठ है। बाबा औघड़नाथ मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित श्रीधर त्रिपाठी और मंदिर समिति अध्यक्ष डॉ. महेश बंसल के अनुसार पंचांग के साथ अन्य धर्मगुरुओं के अनुसार 23 की शाम लगभग 6:20 के आसपास होलिका दहन किया जाना चाहिए।
भगवान परशुराम उत्सव समिति के पदाधिकारी पंडित राकेश गौड़ ने कहा 22 मार्च 3:12 मिनट से 23 मार्च सुबह 4:21 तक भद्रा रहेगी। इस काल में होलिका दहन नहीं किया जा सकता। पूर्णिमा 23 मार्च को शाम 5:36 तक रहेगी। दहन का सही समय 6:30 बजे रहेगा। ज्योतिष वैज्ञानिक भारत ज्ञान भूषण के अनुसार होलिका दहन का समय शाम 5:00 बजे से है। ज्योतिष एवं पुरोहित ब्राह्मण सभा के महामंत्री पंडित मुकेश पैन्यूली के अनुसार होलिका दहन 23 को शाम 6:30 बजे किया जाना चाहिए। अखिल भारत वर्षीय धर्म संघ के विनोद कुमार रस्तोगी के अनुसार 22 मार्च की रात 3:45 बजे शुभ समय है।
महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर गुरु मां निलिमां नंद जी महाराज के अनुसार होलिका दहन 22 की रात 3:45 बजे किया जाना चाहिए। बुढ़ाना गेट सिद्धपीठ हनुमान मंदिर में सोमवार को पंडित अनिल पाठक की अध्यक्षता में बैठक हुई। सर्वसम्मति से होलिका दहन का समय 22 मार्च की रात 3:45 बजे निश्चित किया गया। बैठक में चरण दत्त कात्यायन, विनोद कुमार रस्तौगी, चंद्र मणि शर्मा मौजूद रहे।
होलिका पूजन का समय : 23 मार्च
लाभ मुहूर्त - सुबह 6:25 से सुबह 9:00 बजे तक
शुभ योग - सुबह 10:30 से दोपहर 12:00 बजे तक
लाभ मुहूर्त - दोपहर 3:00 से शाम 5:00 बजे तक
निषेध काल - दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक