होली के रंग खुशियों में भंग भी डाल सकते हैं। ऐसे में बाजार में मिलने वाले मिलावटी रंगों की जगह फूलों से तैयार हर्बल रंगों का प्रयोग करें। रंगों में मरकरी सल्फाइड, कॉपर सल्फेट, क्रोमियम आयोडाइड, लेड, पारा, पिसा हुआ शीशा व कांच, बालू, मिट्टी, चीनी डस्ट, स्टोन डस्ट, डीजल व ग्रीस तक की मिलावट होती है। ये केमिकल और मिलावटी पदार्थ रंग के जरिए त्वचा पर चिपककर नुकसान पहुंचाते हैं। पानी में घुलने वाले रंगों में सूखे रंगों से अधिक केमिकल होते हैं। फिजिशियन तनुराज सिरोही के अनुसार चाइना रंग, पेंट कलर, डार्क कलर, ब्लैक ऑयल कलर अधिक खतरनाक हैं। अगर मुंह में रंग चला जाए तो फेफड़े और गुर्दे भी खराब हो सकते हैं।
इन रंगाें में है ये मिलावट
रंग- मिलावट- हानि
लाल- मरकरी सल्फाइड, शीशा- गुर्दे में खराबी व त्वचा की एलर्जी
काला- पारा, लेड ऑक्साइड- त्वचा का कैंसर
हरा- कॉपर सल्फेट- शरीर व चेहरे को नुकसान, आंखों की रोशनी जा सकती है
गहरा गुलाबी- क्रोमियम आयोडाइड- अस्थमा, त्वचा पर फुंसियां
लाल गुलाल- मरकरी सल्फाइड- त्वचा का कैंसर
नीला- रशियन ब्लू- त्वचा में खुजली, संक्रमण
पीला- क्रोमियम आयोडाइड- सांस की एलर्जी
पर्सियन ब्लू- लेड केमिकल- त्वचा में चकतेे, त्वचा का उधड़ना
गोल्डन, सिल्वर, चमकीले रंग- एल्युमिनियम ब्रोमाइड- कैंसर
घर पर ऐसे बनाएं हर्बल रंग
गुलाब, गुड़हल, लाल स्याही के बीज व टेसू के फूलों, चुकंदर व अनार के रस से भी लाल रंग बना सकते हैं। गेंदे, सूरजमुखी, हल्दी, बेसन व केसर से पीला रंग बन सकता है। मेंहदी, मैथी के पत्ते, पालक के पत्ते व पत्तियों से हरा रंग बन सकता है। चंदन की लकड़ी का बुरादा भी प्रयोग कर सकते हैं। काला रंग काले अंगूरों के जूस को पानी में मिलाकर बना सकते हैं। नीला रंग नीली गुलमोहर को आटे में मिलाकर बनाएं। केसरिया रंग टेसू के फूलों से बनाएं। भूरा रंग पान में प्रयोग होने वाले कत्थे को पीसकर पानी में मिलाकर बनाएं। इनसे बेहतर फूलों की होली खेलें। चंदन का टीका लगाएं। सूखा गुलाल लगाएं जिसे बाद में आसानी से सूखा ही झड़ा दें जो नुकसान नहीं देगा।
इन बातों का रखें ख्याल
. होली खेलने से पहले पूरे शरीर, बालों पर नारियल तेल, सरसों तेल, बादाम या जैतून का तेल लगाएं
. शरीर पर वॉटरप्रूफ मॉस्चुराइजर और सनस्क्रीन लगाएं
. नाखूनों पर नेलपेंट की मोटी परत लगा लें
. पूरे शरीर को ढंकने वाले सूती कपड़े पहनकर होली खेले
. हल्के व हर्बल रंगों का ही प्रयोग करें
. रंग को बेहद आराम से जितना छूटे उतना ही छुड़ाएं, रगड़े नहीं, कपड़े धोने का साबुन, डिटरजेंट या मिट्टी तेल का प्रयोग न करें।
. रंग छुड़ाने के लिए खीरा, टमाटर, आलू, बेसन, मूंग की दाल, चंदन, मलाई, दही का उबटन प्रयोग करें
. रंग छुड़ाने के बाद जलन हो तो आईस क्यूब या ठंडे टी बैग का प्रयोग करें
. काले, सिल्वर, गोल्डन रंगों का प्रयोग कतई न करें
. बच्चे, हृदय रोगी, त्वचा के रोगी, श्वांस रोगी होली न खेलें।
केमिकल की मिलावट से कैंसर
रंगों के अधिक प्रयोग से त्वचा में जलन, बालों में रुखापन, त्वचा फटना, फुंसियां निकलना, जलन, एग्जिमा होना, त्वचा में रेशेज आने की शिकायत हो सकती है। यह सभी त्वचा के संक्रमण हैं जो आगे चलकर कैंसर का रूप भी ले सकता है। -डॉ. रुचिका गुप्ता, त्वचा रोग विशेषज्ञ
त्वचा, पेट, किडनी, फेफड़े पर प्रहार
रंग मुंह के जरिए पेट में जाकर किडनी को प्रभावित कर सकता है। आंखों में जाकर जलन दे सकता है। आंखों की रोशनी जा सकती है। वहीं नाक के जरिए फेफड़ों तक जाकर अस्थाई अस्थमा हो सकता है। सूखे रंगों में सिलिका होता है इन्हें भी कम प्रयोग करें। -डॉ. तनुराज सिरोही, वरिष्ठ फिजिशियन
पाउडर जैसा रंग प्रयोग करें
होली खेलते समय यह देख लें कि रंग पाउडर जैसा होना चाहिए, दानेदार या खुरदरा नहीं। रासायनिक रंगों से त्वचा में संक्रमण हो सकता है। रंगों से आंखें भी बचाकर रखें।
- डॉ. अभिराज ठाकुर, स्किन स्पेशलिस्ट