ऐतिहासिक रोमन कैथलिक चर्च को बेगम समरू द्वारा बनवाया गया था। यह ऐतिहासिक चर्च सौहार्द, आस्था और इतिहास का बेजोड़ नमूना है। इस चर्च को ईसाई धर्म के लोग कृपाओं की माता मरियम का तीर्थस्थान मानते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता मरियम अपने श्रद्धालुओं पर कृपा बरसाती हैं। खास बात यह है कि मां मरियम के दर्शन करने के लिए यहां देश-विदेशों से लोग आते हैं। इस ऐतिहासिक चर्च के कारण ही सरधना का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकता है।
ये है चर्च का इतिहास
बेगम समरू के द्वारा बनवाए गए इस चर्च को पोप जॉन 23वें ने 1961 में माइनर बसिलिका का दर्जा दिया था। बताना जरूरी होगा कि ऐतिहासिक और भव्य गिरिजाघरों को ही यह दर्जा प्राप्त होता है। बड़ी बात यह है कि इस चर्च को बनने में करीब 11 वर्षों का समय लगा था। इस चर्च के निर्माण का कार्य वर्ष 1809 में शुरू हुआ था। इस ऐतिहासिक चर्च के खास दरवाजे पर इमारत के बनने का वर्ष 1822 दशार्या गया है। इस चर्च के निर्माण में कई सौ लोग समेत कलाकार भी लगे थे। यहां हर वर्ष नवंबर माह के दूसरे शनिवार-रविवार को मेले का आयोजन होता है। जबकि 25 दिसंबर को लोग मां मरियम के दर्शन करने आते हैं।
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