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एक मंच पर आए हिंदू-मुस्लिम धर्मगुरु, एकता का दिया संदेश

Tue, 03 Apr 2018 05:03 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
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कौमी एकता कांफ्रेंस में मंचासीन हिंदू-मुस्लिम धर्मगुरु - फोटो : अमर उजाला
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दारुल उलूम अशरफिया में आयोजित हुई कौमी एकता कांफ्रेंस में हिंदू और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने सियासी मुद्दों को एक तरफ कर आपस में प्यार और मोहब्बत से रहने का संदेश दिया। इस दौरान कार्यक्रम में 95 मदरसा छात्रों की दस्तारबंदी भी की गई। 

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रविवार की रात्रि ईदगाह रोड स्थित दारुल उलूम अशरफिया में हुए कार्यक्रम में संस्था के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने कहा कि आज मुल्क ऐसे मुहाने पर खड़ा है जहां छोटी से चिंगारी से नफरत की आग भड़क सकती है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के आह्वान पर देवबंद में हुई पहली कौमी एकता कांफ्रेंस से यह संदेश पूरे मुल्क में जाएगा कि हिंदू-मुस्लिम एकता न कभी टूटी ओर न ही कभी टूट पाएगी। श्रीराम दरबार के संस्थापक पंडित मोहन जी महाराज ने कहा कि सियासत में इस तरह के मुद्दे सामने आते हैं जिससे वोट बैंक प्रभावित होता है। ऐसे में सर्वसमाज के लोगों की जिम्मेदारी बनती है कि वह इन मुद्दों को दरकिनाकर कर आपसी सौहार्द को बढ़ावा दें और हिंदू मुस्लिमों को आपस में लड़वाने वाले लोगों को करारा जवाब दें। उन्होंने हिंदू मुस्लिमों में सदभावना कायम करने के लिए दोनों समुदाय के लोगों को मिलाकर छोटी छोटी कमेटियां गठित किए जाने की अपील की। कार्यक्रम में पूर्व विधायक माविया अली, धर्मवीर सिंह, विजय घोष, अपना विचार मंच के अध्यक्ष नजम उस्मानी, मौलाना नजमुल अहमद थानवी ने भी विचार रखें। 

अध्यक्षता दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-आजम मौलाना मुफ्ती हबीबुर्रहमान आजमी व संचालन सालिम अशरफ ने किया। इस मौके पर महमूद चौधरी, शहजाद उस्मानी, ताहिर हसन शिबली, मुफ्ती अहमद गौड, मौ. उबैद, मौलाना शाह आलम, सैफुल इस्लाम, मौलाना इब्राहीम कासमी, सलीम कुरैशी, शद्दन खान आदि मौजूद रहे।
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