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पाकिस्तान से विस्थापित हिंदू परिवार बोले, दाह संस्कार नहीं करने देते, कहते थे दफनाओ

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पाकिस्तान से विस्थापित हिंदू परिवारों ने बयां किया दर्द, दाह संस्कार नहीं करने देते थे, कहते थे दफनाओ’
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मेरठ। पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए दिल्ली स्थित मजनू के टीले पर रह रहे 200 हिंदू परिवारों के प्रतिनिधि मंडल ने सांसद राजेंद्र अग्रवाल के आवास पर पहुंच कर उनसे मुलाकात की। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कई चौंकाने वाली बातें बताईं। अर्जुन ने बताया वर्ष 2011 में हम पाकिस्तान से भारत आ गए थे। इसके बाद दिल्ली स्थित मजनू के टीले पर रहने लगे। पाकिस्तान के हालात खराब होने पर हमने भारत लौटने का मन बनाया। वहां हमारे धर्म पर हमला होता था। हमें दाह संस्कार नहीं करने दिया जाता था। कहा जाता था कि शव को दफनाओ। होली ओर दिवाली मनाने के लिए भी मना किया जाता था।
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नहीं करने दी जाती थी पूजा
प्रतिनिधि मंडल में शामिल चंद्रमा ने बताया कि पाकिस्तान में हमारे बच्चों को नहीं पता था कि दिवाली और होली कैसे मनाए जाते हैं। कोई पूजा भी नहीं करने दी जाती थी। हम वहां पर छिप-छिप कर रहने लगे थे। नागरिकता संशोधन कानून बन जाने के बाद हमें राहत मिली है। उन्होंने बताया कि सांसद राजेंद्र अग्रवाल भी एक बार उनसे मिलने के लिए मजनू के टीले पर आए और हमें 25 हजार की सहायता राशि भी दी थी। वहीं, सांसद ने भी प्रतिनिधि मंडल को रहने की व्यवस्था, रोजगार का सरकार से वार्ता कराने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में ऐसा लग रहा है जैसे कोई अन्याय हो गया है, लेकिन जिन्हें इससे लाभ मिला है उन्होंने इसका स्वागत किया है। प्रतिनिधि मंडल में गरीबदास, कंवरलाल, नेहरु लाल मौजूद रहे।
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