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हिंदी हैं हम अभियान: कवि श्याम बिहारी ने हर वर्ग में किया हिंदी का प्रचार

Sun, 30 Aug 2020 02:20 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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कवि स्व. श्याम बिहारी - फोटो : अमर उजाला
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कविता और गीतों के जरिए हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने में कवि स्व. श्याम बिहारी ने महती जिम्मेदारी निभाई। कविताओं, कहानियों और गीतों के माध्यम से उन्होंने समाज के हर वर्ग को हिंदी से जोड़ा। बच्चों के लिए बाल कथाएं और कविताएं लिखीं। युवाओं के लिए राष्ट्रीय संवेदना के गीत रचकर उन्हें मातृभाषा के लावण्य से परिचित कराया।   

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मेरठ सदर में जन्मे श्याम बिहारी बहुआयामी प्रतिभा के धनी कहे जाते हैं। स्वयं शिक्षित होकर उन्होंने अध्यापन की राह पकड़ी, प्राचार्य हुए। सैकड़ों युवाओं को मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा से जोड़ा। गद्य, पद्य में समान गति रखते हुए इन्होंने नवनीत, युगधर्म, साक्षी, जीवन प्रभात व अणुव्रत पत्रिकाओं में अपनी रचनाओं का प्रकाशन कराया। बालोपयोगी पुस्तकों के जरिए बच्चों को हिंदी से जोड़ते गए। कवि श्याम बिहारी ने जयभारती में कई गीत लिखे। ये गीत युवाओं में राष्ट्रचिंतन की भावना को जगाने वाले थे। इन गीतों को स्वयं सेवक संघ की शाखाओं में भी गाया गया। एक गीत में श्याम बिहारी लिखते हैं अर्चन का एक कण हूं, साधना का एक क्षण हूं, चेतना में जागरण हूं, साधना का एक क्षण हूं। युवाओं को राष्ट्रप्रेम से जोड़ते हुए उन्होंने लिखा कि न रक्तदान चाहिए, श्रमदान दो, राष्ट्र के निर्माण में योगदान दो।  

कवि श्याम बिहारी ने हर वर्ग में किया हिंदी का प्रचार
हिंदी के जरिए उन्होंने राष्ट्रीय गीतों की परंपरा का विस्तार किया। जयभारती में संकलित उनके गीतों की सार्थकता समाज ने महसूस की और उसे अपनाया। उन्होंने लिखा कि निर्भर होकर आज खड़ा हो, गा तू अपने गीत, सिंहनाद कर आगे बढ़कर, बाधाओं से ले तू टक्कर। दूसरे गीत में लिखते हैं जननी के पावन चरणों में, जीवन पुष्प चढ़ाना सीखें, कंटक पथ अपनाना सीखें।
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हर वर्ष कराते हिंदी हस्ताक्षर प्रतियोगिता 
पिताजी हिंदी के प्रबल समर्थक थे। विद्यालय में प्रतिवर्ष हिंदी हस्ताक्षर प्रतियोगिता कराते थे। ताकि युवाओं का लेख सुधरे और हिंदी के प्रति उनका आकर्षण बढ़े। उन्होंने राष्ट्रीय गीतों में सदैव हिंदी के महत्व को बढ़ाया। - शीलवर्धन पुत्र श्याम बिहारी

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