मेरठ बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से लेकर जिले के सभी भाजपा जनप्रतिनिधियों की निंदा की। कहा कि इन्होंने हाईकोर्ट बेंच की स्थापना का कोई प्रयास या समर्थन नहीं किया है। भविष्य में जनता के लिए बेंच की मांग के समर्थन में किसी भी प्रतिनिधि से वकालत नहीं कराए जाने और राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी को बेंच की स्थापना के लिए अधिवक्ताओं द्वारा दिए गए वकालतनामे को वापस लेने का निर्णय लिया गया।
मेरठ बार एसोसिएशन के उन सभी जनप्रतिनिधियों को जो भाजपा से संबंधित हैं, उनकी सदस्यता शीघ्र समाप्त किए जाने का भी निर्णय लिया गया। बेंच की स्थापना को लेकर सहारनपुर में शीघ्र ही केंद्रीय संघर्ष समिति की बैठक किए जाने की घोषणा भी की गई। अधिवक्ताओं ने कहा कि वह जल्द ही संयुक्त व्यापार संघ और शहर के तमाम संघों के पदाधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक करेंगे। जनता और व्यापारियों को इससे अवगत कराएंगे कि मुख्यमंत्री ने सेंट्रल मार्केट के ध्वस्तीकरण की समस्या के निस्तारण और हाईकोर्ट बेंच के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी है।
अधिवक्ताओं का ये है दावा
बता दें कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अधिवक्ताओं का एक प्रतिनिधिमंडल मिला था। अधिवक्ताओं का दावा है कि मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट बेंच के लिए उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी थी और यह कहा था कि सरकार हाईकोर्ट बेंच नहीं दे सकती। इससे अधिवक्ता नाराज हैं। सभा में मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा, महामंत्री परवेज आलम, अधिवक्ता गजेंद्र सिंह धामा, प्रबोध कुमार शर्मा, वीरेंद्र सिरोही, सतीश कुमार राजवाल, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अजय त्यागी, अनिल कुमार बख्शी, गजेंद्र सिंह धामा, सतीश चंद गुप्ता, उदयवीर सिंह राणा, कुंवर पाल शर्मा, पूर्व महामंत्री प्रबोध कुमार शर्मा, अब्दुल जब्बार खां और धर्मेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।
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