सीसीएसयू के अटल सभागार में प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के कलाकारों ने नाट्य प्रस्तुति ने मन को झकझोरा
-पत्नी की मृत्यु के बाद बहू-बेटे को पिता के पास बैठने का समय नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। संगीत नाटक अकादमी लखनऊ द्वारा जिला प्रशासन के सहयोग से सीसीएस यूनिवर्सिटी में त्रिदिवसीय प्रादेशिक नाटक मंचन हुआ। अटल सभागार में हाय हैंडसम का मंचन किया गया। लखनऊ के यायावर रंगमंडल ने दिखाया कि उम्र के अंतिम पड़ाव में जब जीवन साथी भी बिछुड जाता है और बेटे-बहू को पास बैठकर दो बातें करने की भी फुर्सत न हो। उस वक्त व्यक्ति का मन पीड़ा से व्याकुल हो उठता है। इस व्यावहारिक समस्या को नाटक में अत्यंत भावुक और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया।
कर्नल कपूर अपनी पत्नी की मृत्यु के पश्चात स्वयं को अकेला महसूस करते हैं। वे चाहते हैं कि उनके घर में पोती-पोते की किलकारियां गूंजे। मॉडलिंग की दीवानी उनकी बहू मंदा अपनी फिगर खराब होने के भय से अपने पति स्वामी से दूरी बनाए रखती है। इस दुविधा में बेटा अपनी पत्नी और पिता के बीच असमंजस की स्थिति में फंसा रहता है।
दूसरी ओर कर्नल की समधन सीता भी अपने घर में अकेलेपन का जीवन व्यतीत कर रही हैं। उनका भी मंदा के अतिरिक्त कोई अपना नहीं है। सीता का कर्नल के घर आना-जाना लगा रहता है। इसी दौरान कर्नल और सीता एक दूसरे को समझने और जानने का प्रयास करते हैं। धीरे धीरे दोनों के बीच स्नेह का भाव विकसित होता है और अंततः परिस्थितिवश वे विवाह का निर्णय लेते हैं।
उम्र से सेवानिवृत्त हों, जीवन से नहीं : भारत भूषण
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के सदस्य भारत भूषण शर्मा ने कहा कि यह नाटक दर्शकों को स्वस्थ मनोरंजन प्रदान करने के साथ साथ सार्थक संदेश देता है। यह बताता है कि मनुष्य को युवा अवस्था से अधिक वृद्धावस्था में जीवन साथी की आवश्यकता होती है। हमें उम्र से भले ही सेवानिवृत्त होना पड़े पर जीवन से कभी सेवानिवृत्त नहीं होना चाहिए। कार्यक्रम में शहर के समाजसेवी, कलाप्रेमी के अलावा भारत ज्ञान भूषण, महेश त्यागी, एस वत्य, शील वर्धन, डॉ. अश्वनी शर्मा आदि रहे। संवाद
चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के अटल सभागार में तीन दिवसीय संगीत नाटक अकादमी लखनऊ द्वारा आयोजित का
चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी के अटल सभागार में तीन दिवसीय संगीत नाटक अकादमी लखनऊ द्वारा आयोजित का