- बुधवार शाम को आईएमए हॉल में हुआ मुशायरा व कवि सम्मलेन का आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ।
है साक्षी काशी का हर एक घाट अभी तक,
होता था भजन आपका शहनाई हमारी।
आज दुनियाभर में धर्म और भाषा के नाम पर तमाम बहस सुनने को मिल जाती हैं। इस माहौल में मेरठ की धरती से एक मुस्लिम शायर अजहर इकबाल जब इस तरह की शायरी पढ़ता है तो यकीन होता है कि देश में गंगा-जमुनी तहजीब की बखूबी नुमाइंदगी हो रही है। दरअसल, बुधवार को तीन भाषाओं हिंदी, उर्दू और पंजाबी की जुगलबंदी से शहर की शाम गुल ओ गुलजार हो गई। हर्फकार फाउंडेशन और पंजाबी अकादमी उत्तर प्रदेश की जानिब से सजाई गई इस नायाब महफिल में देश के नामचीन कवियों और शायरों ने काव्य के नवरस की बौछार कर श्रोताओं को सराबोर कर दिया।
आइएमए हॉल में आयोजित कविसम्मेलन और मुशायरे का संयोजन अजहर इकबाल ने किया। अजहर इकबार साहित्य के संसार में अपनी विशिष्ठ शैली और काव्यशिल्प के लिए जाने जाते हैं। बुधवार को भी उनकी शायरी से रसिक श्रोताओं के दिलों पर नशा सा तारी हो गया। शायरी से इतर अपने संबोधन में अजहर इकबाल ने कहा कि भाषाएं एक दूसरे को करीब लाने का काम करती हैं। एक दूसरे की सभ्यताओं तहजीब को जानने का मौका देती हैं। इस प्रकार के आयोजनों से पंजाबी, उर्दू, हिंदी के शायर एक मंच से मुल्क के मुख्तलिफ रंगों की खुशबू का अहसास कराते हैं।
महफिल परवान चढ़ी तो हिमांशी बाबरा ने पढ़ा कि
नहीं मेरी वापसी का कोई ऐतबार कहना, वो करे न जिंदगी भर मेरा इंतजार कहना।
इल्मा हाशमी ने अपने जज्बात का इजहार कुछ यूं किया कि
खुशी थी के उसका प्यार मिला, और ये गम के एक बार मिला, उसके आने का रास्ता देखा। मेरी आंखों को इंतजार मिला।
नंदकिशोर आनंद ने कहा कि
चल अपनी बे-वफाई को तू मान तो गया, सर से तेरी वफाओं का एहसान तो गया।
अंजलि बांग्ला ने पढ़ा कि
होंगी अगर जंजीरें तो हम भागना चाहें शायद, फिर ये बंधन ढूंढा उसने पायल लाकर दी है।
अजम शाकरी ने कहा कि
सुबह तक दर्द की शाख पर एक दिया झिलमिलाता रहा, आंख मंज़र बताती रही और दिल मुस्कुराता रहा।
इसके बाद मुकेश आलम ने अपनी रचना सुनाई। कार्यक्रम में अकादमी के निदेशक राजबहादुर ने कहा कि साहित्य दिलों को जोड़ता है। पीआरओ अरविंद नारायण मिश्र ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी का धन्यवाद किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नबील अनवर व विशिष्ट अतिथि डॉक्टर यूनुस अहमद रहे। यहां कोऑर्डिनेटर डॉ. ताबिश फरीद , सरदार सरबजीत सिंह कपूर आदि रहे।