मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने भाषण के दौरान अमूमन बोलते हैं कि हमारे लिए हर जान कीमती है और हर मौत दुखद। जनहानि को रोकने और हर नागरिक को बेहतर इलाज सुलभ कराने के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं में आमूल चूल परिवर्तन की रूपरेखा तैयार की गई। इसके लिए सरकारी खजाने का मुंह खोल दिया गया। इसी सिलसिले को परवाज देते हुए मेरठ में भी तमाम इंतजामात किए गए। बिल्डिंग बना दी गई, लेकिन शासकीय हीलाहवाली के चलते इसे पूरी तरह अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। मसलन, इनमें जांच और इलाज शुरू नहीं हो पाया है। चिकित्सा अधिकारी लंबे समय से इन सुविधाओं को जल्द शुरू करने का दावा करते आ रहे हैं।
कब शुरू होगी इंट्रीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब
पीएल शर्मा जिला अस्पताल में इंट्रीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब (आईपीएचएल) का पिछले साल सितंबर में शिलान्यास किया गया था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने वर्चुअली इसका शिलान्यास किया था। बिल्डिंग बनकर तैयार है, लेकिन अभी न स्टाफ मिला है और न उपकरण। यहां गंभीर बीमारियों की जांच होनी है। अभी जो सैंपल मेडिकल कॉलेज भेजने पड़ते हैं। लैब बनने के बाद वे वहां नहीं भेजने पड़ेंगे। यहां कोरोना, डेंगू, चिकनगुनिया, स्क्रबटाइफस, एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम, कालाजार, डायरिया, टायफायड, हेपेटाइटिस, संचारी रोगों से जुड़ी जरूरी जांचें, कैंसर, अल्जाइमर, अन्य सभी गैर संचारी रोगों की जांच होनी है। अभी इनमें से अधिकांश जांचें मेडिकल कॉलेज में होती हैं।
मेडिकल की बर्न यूनिट में कब शुरू होगा इलाज
एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में करीब तीन करोड़ रुपये कीमत से बनी बर्न यूनिट का लोकार्पण 10 मई 2022 को मुख्यमंत्री योगी ने किया था, लेकिन अभी तक बर्न यूनिट पूरी तरह से चालू नहीं हो पाई है। दरअसल, अभी स्टाफ नहीं मिल सका है। न पाइप लाइन से ऑक्सीजन की व्यवस्था हो पाई है। इलाज कब मिलेगा, किसी को पता नहीं है। बर्न यूनिट में पांच बेड की आईसीयू है। 20 बेड का जनरल वार्ड है। कम जले हुए मरीजों को तो भर्ती कर लिया जाता है, मगर गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
आईसीयू को कब मिलेगा स्टाफ
जिला अस्पताल में बनी आईसीयू भी शुरू नहीं हो पाई है। करीब पांच साल पहले आईसीयू को शुरू करा दिया गया था, बेड डालकर भर्ती कर लिए गए थे, लेकिन स्टाफ न होने के कारण चंद दिन बाद ही उसे बंद कर दिया गया। उसमें कोरोना की वैक्सीन लगाई जा रही थी। अब वैक्सीन भी नहीं लग रही, फिलहाल आईसीयू बंद है।
एमआरआई यूनिट के लिए आनी है मशीन, नहीं मिला बजट
जिला अस्पताल में एमआरआई यूनिट बने हुए करीब साढ़े चार साल हो गए, लेकिन अभी तक इसकी शुरुआत नहीं हो सकी है। यहां करीब सात करोड़ रुपये की एमआरआई मशीन, स्टाफ आना है। मरीजों को मेगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) के लिए या तो मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है या फिर निजी लैब में महंगी जांच कराने को मजबूर हैं। निजी लैब में एमआरआई के लिए तीन से 25 हजार तक खर्च आता है। इस बार भी मशीन के लिए बजट में इसका प्रावधान नहीं किया गया है। लिहाजा अभी भी लोग इस सुविधा से महरूम रहेंगे।