आयुष्मान भारत... पैनल के 62 अस्पतालों को परखेगा स्वास्थ्य विभाग
मेरठ। आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में जिले 62 अस्पताल पंजीकृत हैं। इन अस्पतालों को मानकों पालन किया जा रहा है या नहीं, मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है या नहीं, आदि बिंदुओं पर परखा जाएगा। इसके लिए मुख्य विकास अधिकारी ईशा दुहन ने स्वास्थ्य विभाग को टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं। एसीएमओ डॉ. पूजा शर्मा ने पांच सदस्य टीम का गठन किया है।
दरअसल, आयुष्मान में पंजीकृत अस्पतालों की शिकायतें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के पास आती रहती हैं कि नियमों का पालन नहीं हो रहा है, या बेहतर इलाज नहीं मिल रहा है। गोल्डन कार्ड होने के बावजूद इलाज नहीं मिला आदि शिकायतें भी हैं। लिहाजा इन्हें परखने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि बुधवार से पड़ताल शुरू हो जाएगी। हर रोज दो से तीन अस्पतालों का निरीक्षण टीम करेगी। लापरवाही पाए गई तो कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी तरफ, शासन से गठित चार सदस्य टीम भी मंडल के 20 अस्पतालों की जांच कर रही है। इनमें से पांच अस्पतालों की गोपनीय रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। इन अस्पतालों पर बिना इलाज किए क्लेम लेने और कम पैसों के इलाज का ज्यादा क्लेम संबंधी कई तरह के आरोप हैं। आरोप सही पाए जाने पर इन्हें पैनल से हटाया जा सकता है। ये अस्पताल मेरठ के अलावा, हापुड़, बुलंदशहर, बागपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर जिलों के हैं। मेरठ के इनमें 11 अस्पताल हैं। इससे पहले भी कई अस्पतालों पर बिना इलाज किए क्लेम लेने पर पैनल से नाम हटाए गए थे। स्वास्थ्य विभाग लगातार योजना से जुड़े अस्पतालों की पड़ताल कर रहा है। मानकों के अलावा उनमें कितने मरीजों को इलाज मिला यह भी देखा जा रहा है।
141 अस्पतालों ने आवेदन ही नहीं किए
इस योजना के तहत आवेदन करने वाले 40 अस्पतालों-नर्सिंग होम के आवेदन पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं, जबकि इसमें शामिल दो अस्पतालों ने अपने अपने नाम वापस ले लिए थे। आरोप लगने पर आधा दर्जन से ज्यादा अस्पताल पैनल से निकाले जा चुके हैं। प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट आयुष्मान योजना में जनपद के मेरठ में 102 अस्पतालों-नर्सिंग होम ने आवेदन किए थे। स्वास्थ्य विभाग में 243 अस्पताल-नर्सिंग होम पंजीकृत हैं, जिनमें से 141 अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने इस योजना में शामिल होना ही मुनासिब नहीं समझा।