आयुष्मान भारत : गोल्डन कार्ड बनाने घर-घर पहुंचेगा स्वास्थ्य विभाग
मेरठ। आयुष्मान भारत के तहत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में गोल्डन कार्ड के लिए परेशान लाभार्थियों के लिए राहत की खबर है। अब स्वास्थ्य विभाग गांव-गांव, मोहल्ला-मोहल्ला और बाद में घर-घर जाकर गोल्डन कार्ड बनाएगा। इसके लिए विभाग तीन महीने तक अभियान चलाएगा। कोशिश रहेगी कि ज्यादा से ज्यादा लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बन सकें। इसके अलावा योजना में तीन तलाक पीड़िताओं को भी शामिल किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने एसपी सिटी को पत्र लिखकर ऐसी महिलाओं की सूची मांगी है।
दरअसल, इस योजना को शुरू हुए 15 माह से ज्यादा का समय हो गया है। लेकिन अभी भी एक लाख 19 हजार 683 लाभार्थी परिवारों के नौ लाख 37 हजार 397 लोगों के गोल्डन कार्ड नहीं बन सके हैं, जबकि इलाज केदौरान गोल्डन कार्ड का होना जरूरी है। अगर गोल्डन कार्ड नहीं है तो इलाज नहीं मिलता है। कई बार तो इलाज के दौरान ही लोगों को गोल्डन कार्ड बनवाना पड़ता है।
योजना के तहत इससे पहले भी लाभार्थियों को घर-घर जाकर पर्चा कार्ड देने की योजना थी, जो गोल्डन कार्ड की तरह ही स्वास्थ्य सेवा केलिए मान्य बताई गई थी। इसमें परिवार के मुखिया समेत परिवार के पांच सदस्यों का विवरण दर्ज था, लेकिन यह योजना धड़ाम हो गई। सारे परिवारों तक इन्हें नहीं पहुंचाया जा सका। इसके अलावा इलाज के लिए यह अब मान्य भी नहीं है। इस बार गोल्डन कार्ड बनाने की योजना कितनी परवान चढ़ेगी, यह आने वाला समय बताएगा।
- योजना में 60 अस्पताल पंजीकृत
आयुष्मान योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को हुई थी। इसमें फिलहाल 60 अस्पताल पंजीकृत हैं, जिनमें छह सरकारी और 54 निजी अस्पताल हैं। योजना में जिले के दो हजार 510 परिवारों के 12 हजार 550 लाभार्थी स्वास्थ्य विभाग को मिल भी नहीं पाए हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस दौरान ये परिवार भी मिल सकते हैं। जिले में दो लाख 11 हजार 416 परिवार चिह्नित हैं। इनमें 89 हजार 109 परिवार देहात और एक लाख 22 हजार 307 परिवार शहरी क्षेत्र के हैं। साल 2011 की आर्थिक गणना की सूची के आधार पर इसे तैयार किया गया है।
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- फिर से शुरू किया जा रहा अभियान
गोल्डन कार्ड बनाने के लिए फिर से अभियान शुरू किया जा रहा है, जो तीन माह चलेगा। स्वास्थ्य विभाग शहर में मोहल्ला-मोहल्ला और देहात में गांव-गांव जाकर कैंप लगाएगा। टीमों का गठन किया जा रहा है। इसी सप्ताह से इसकी शुरुआत हो जाएगी।
- डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी