भ्रूण लिंग परीक्षण में पकड़े गए लोग
- फोटो : अमर उजाला
हरियाणा और मेरठ के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मुखबिर योजना के तहत स्टिंग ऑपरेशन कर भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में दंत चिकित्सक समेत दो लोगों को मेडिकल पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनके पास से 10 हजार रुपये बरामद किए गए हैं। आरोपियों पर केस दर्ज कराया गया है।
एसीएमओ डॉ. प्रवीण गौतम ने बताया कि गुरुवार को बचत भवन में हरियाणा के चिकित्सक डॉ. आदर्श शर्मा की टीम प्रेजेंटेशन के जरिये भ्रूण लिंग परीक्षण पकड़ने के टिप्स दे रही थी। इसी दौरान तय किया गया कि भ्रूण लिंग परीक्षण को पिछले काफी दिनों से मिल रही सूचना की पड़ताल की जाए। इसके तहत महिला मुखबिर को तेजगढ़ी चौराहे के पास दंत क्लीनिक चलाने वाले डॉ. वैभव मुद्गल के क्लीनिक पर भेजा गया। जहां से महिला को दंत चिकित्सक ने फुरकान नामक व्यक्ति के साथ अल्ट्रासाउंड कराने के लिए एक निजी चिकित्सालय भेजा। हालांकि वहां भीड़ होने के कारण अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। इस बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मेडिकल थाने की पुलिस के साथ मिलकर फुरकान और डॉ. वैभव मुद्गल को पकड़ लिया। दोनों के पास से महिला को दिए गए 5-5 हजार रुपये बरामद किए गए। मेडिकल पुलिस इन्हें थाने ले गई है। डॉ. गौतम ने बताया कि महिला को 35 हजार रुपये दिए गए थे, जिनमें से 18 हजार रुपये महिला ने वापस कर दिए हैं। सात हजार रुपये नहीं मिले हैं। इनकी बाबत आरोपियों से पुलिस पूछताछ कर रही है।
यह है मुखबिर योजना
एक स्टिंग ऑपरेशन पर शासन दो लाख रुपये खर्च करता है। इनमें भ्रूण जांच या गर्भपात कराने वाले सेंटर को ढूंढने वाले व्यक्ति को 60 हजार रुपये दिए जाते हैं। जो महिला मिथ्या गर्भवती बनकर सेंटर में जाएगी, उसे एक लाख रुपये दिए जाते हैं। जो महिला के साथ सहयोगी बनकर जाएगा या जाएगी उसे 40 हजार रुपये दिए जाते हैं। इसमें दोष सिद्ध होने पर पांच साल कैद और एक लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। डॉक्टर और जांच कराने वाले व्यक्तियों को समान कैद और जुर्माना हो सकता है।
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