सहारनपुर/मेरठ। ऑनलाइन गेम में रुपये हारने पर हेड कांस्टेबल अमित कुमार ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। सहारनपुर में एसएसपी आवास पर ड्यूटी के दौरान उसने घटना को अंजाम दिया। जांच में सामने आया कि वह ऑनलाइन गेम में लाखों रुपये हार चुका था। इस कारण कई दिनों से तनाव में था। कर्ज होने के कारण उसने यह कदम उठाया।
देहरादून रोड पर एसएसपी रोहित सिंह सजवाण का आवास है। अमित कुमार (37) पुत्र राजेंद्र सिंह निवासी मोहम्मदपुर शकिस्त गांव थाना बहसूमा जिला मेरठ की ड्यूटी एसएसपी आवास पर पीछे की तरफ पहरे में लगी थी। शुक्रवार रात अमित ने सरकारी असलहे से गोली मार ली। गोली की आवाज सुनकर आवास परिसर में अफरा-तफरी मच गई। परिसर में ड्यूटी कर रहे अन्य सिपाही मौके पर पहुंचे तो देखा कि अमित खून से लथपथ पड़ा था। हेड कांस्टेबल की ठोड़ी के नीचे से सिर से गोली निकली हुई थी। दोपहर तक मृतक के परिजन भी सहारनपुर पहुंच गए। पुलिस ने मृतक के पास मिले मोबाइल से जांच शुरू की। इसमें सामने आया कि कुछ दिन पहले ही अमित ने स्मार्टफोन की बजाय की-पैड वाला मोबाइल इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में पता चला है कि अमित ऑनलाइन गेम खेलता था। इसमें वह बड़ी रकम हार गया गया था। उस पर काफी कर्ज हो गया था। हालांकि परिजन इससे अनभिज्ञता जता रहे हैं।
वर्जन
हेड कांस्टेबल अमित पुलिस लाइन में रहता था, जिसने ड्यूटी के दौरान सरकारी असलहे से आत्महत्या की है। आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है।- रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी
ऑनलाइन गेमिंग में बड़ी रकम के साथ जिंदगी भी हार गया अमित
बहसूमा। ऑनलाइन गेमिंग की लत में हेड कांस्टेबल अमित ऐसा फंसा कि बड़ी रकम के साथ जिंदगी भी हार गया। लाखों रुपये का कर्ज होने पर वह परेशान रहने लगा था। खुद भी इस बुरी आदत को छोड़ने की उसने कोशिश की थी। इसी वजह से स्मार्ट फोन की जगह साधारण मोबाइल का इस्तेमाल करने लगा था, लेकिन कर्ज का तनाव वह झेल नहीं पाया। उसका यह आत्मघाती कदम परिवार को जिंदगीभर का गम दे गया।
अमित वर्ष 2011 में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। करीब पांच वर्ष पूर्व उसकी तैनाती सहारनपुर में हुई थी। सहारनपुर में उसकी तैनाती वर्ष 2015 में हुई थी। 2023 में विशेष जांच प्रकोष्ठ में रहा। इसके बाद पुलिस लाइन में आ गया था। पुलिस लाइन में पत्नी शिल्पी, बेटी ईशा (13) और पुत्र समर (10) के साथ रह रहा था। परिवार में पिता राजेंद्र सिंह, मां शशि भी हैं। सहारनपुर से पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा तो पत्नी बेसुध हो गई। मां भी बेटे के शव से लिपटकर बदहवास हो गई। दोनों बच्चों के आंसू भी रुक नहीं रहे थे। शाम को गांव के श्मशान में उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
गांव में अमित की थी अच्छी छवि
अमित सरल और अच्छे स्वभाव का था। गांव में और ड्यूटी पर भी उसका कभी कोई विवाद नहीं हुआ। बताया गया कि अमित ऑनलाइन गेमिंग में काफी दिनों से पैसा लगा रहा था। कभी-कभी वह रकम जीत भी जाता था। बड़ी जीत के लिए उसने काफी रकम लगा दी। कर्ज लेकर भी वह ऑनलाइन गेमिंग में रुपये लगाने लगा। इसके चलते धीरे-धीरे उस पर काफी कर्ज हो गया। इस वजह से वह तनाव में रहने लगा। इस मामले में परिजन कुछ नहीं बोल रहे।
कुछ बड़ा पाने के लिए लेते हैं जोखिम
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. सम्यक जैन बताते हैं कि जल्द ही कुछ बड़ा पाने के लिए लोग कई बार बड़े जोखिम उठाने को तैयार हो जाते हैं। यह एडिक्शन डिसऑर्डर है। लाखों में से एक या दो को ही सफलता मिल पाती है। ऑनलाइन गेम में हारने पर आत्महत्या करना गलत कदम है। अगर हारने पर कर्ज हो गया, तो अपने दोस्त या रिश्तेदार को बताएं। हर समस्या का समाधान है। यदि परिवार का कोई सदस्य हर समय मोबाइल में व्यस्त रहता है तो परिजनों को उससे बात करनी चाहिए। उसके मनोभाव को समझें और बताएं कि यह गलत है।
ऑनलाइन गेमिंग : इस तरह फंसाती हैं कंपनियां
ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों का उद्देश्य अधिक से अधिक मुनाफा कमाना होता है। शुरुआत में वह खेलने वाले को तरह-तरह के लालच देती हैं। छोटी रकम जीतने के बाद फिर वह इस पर और अधिक पैसे खर्च करने लगते हैं, लेकिन तब उन्हें कुछ नहीं मिलता। कई युवा दोबारा पैसे जीतने की उम्मीद से ऑनलाइन जुए में अपने हाथ आजमाते हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर को निराशा हाथ लगती है। इसकी लत लगने के बाद खेलने वाले को कुछ गेम आइटम खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है या फिर उनसे अगले स्तर पर पहुंचने के लिए फीस मांगी जाती है। इससे ये कंपनियां तो पैसा कमा लेती हैं लेकिन खेलने वाले का बैंक खाता खाली हो जाता है। इससे उन्हें आर्थिक परेशानियों के साथ मानसिक तनाव के दौर से भी गुजरना पड़ता है।
-
ऐसे छोड़े ऑनलाइन गेमिंग की लत
किसी भी चीज की लत को कम करना आसान नहीं है। ऐसे ही गेमिंग की लत को भी इतनी आसानी से कम नहीं किया जा सकता है। ऐसे में आपको हर दिन थोड़ा-थोड़ा करके आदत को कम करना होगा। हर दिन किसी भी स्क्रीन के सामने दो घंटे से ज्यादा नहीं बिताना चाहिए। ऐसे में आपको हर दिन खेल का समय 30 मिनट तक सीमित करना होगा। इसके लिए आप फोन पर रिमाइंडर भी लगा सकते हैं।
बेडरूम से गेमिंग डिवाइस हटा दें
अगर आपको सोने से पहले गेम खेलने की आदत है तो यह आदत आपकी नींद खराब कर सकती है। ऐसे में अगर आपने अपने बेडरूम में गेमिंग डिवाइस रखी है तो इसे वहां से हटा दें।
बेकार की एप मोबाइल से हटाएं
कई बार गेमिंग की लत इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि लोग अलग-अलग तरह के गेम मोबाइल में डाउनलोड कर लेते हैं। इस तरह से पूरे दिन गेम खेलने की चेन सी बन जाती है। लत कम करने के लिए आपको गेमिंग एप भी कम करने होंगे।
किसी काम में खुद को रखें व्यस्त
गेमिंग की लत कम करने के लिए तनावमुक्त और रचनात्मक गतिविधियों में खुद को व्यस्त रखें। जब आप अलग-अलग गतिविधि में व्यस्त रहेंगे तो धीरे-धीरे गेम खेलने की लत भी कम होने लगेगी।