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खनन माफिया इकबाल की और बढ़ेंगी मुश्किलें, घर को दर्शाया था मुखौटा कंपनी का दफ्तर, खातों में नहीं था वास्तविक लेनदेन

Thu, 11 Mar 2021 02:46 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

गिरियाशो कंपनी में निदेशक सुमन के बयान से हुआ था खुलासा-
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पूर्व बसपा एमएलसी हाजी मोहम्मद इकबाल का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश की चीनी मिलें खरीदने के लिए पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल और इनके सहयोगियों ने जिन मुखौटा कंपनियों का सहारा लिया, उन कंपनियों का कागजों में बड़ा लेनदेन दर्शाया गया था, जबकि वास्तविक लेनदेन हुआ ही नहीं था। वहीं, कंपनी का ऑफिस जहां दर्शाया था, वह कंपनी की डायरेक्टर का घर था। यह सच्चाई कंपनी की डायरेक्टर सुमन शर्मा द्वारा एसएफआईओ और सीबीआई की जांच के दौरान दिए थे। इन बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मुखौटा कंपनियों का खुलासा हुआ था।
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प्रवर्तन निदेशालय ने एक दिन पहले ही इस मामले में हाजी इकबाल की उन सभी चीनी मिलों की संपत्ति को अटैच किया है, जो मुखौटा कंपनी मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के जरिये खरीदी गई थीं। जब यह कंपनियां बनाई गई थीं तो अपने करीबी लोगों को डायरेक्टर बनाया था, लेकिनइनमें कई डायरेक्टरों ने जांच के दौरान जो बयान दिए थे, उन्हीं से पूरा खेल उजागर हो गया था।

यही वजह है कि 2017 में जब लखनऊ के गोमतीनगर थाने में इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हुई तो कंपनियों के उन डायरेक्टरों के बयानों से हुए खुलासे को भी आधार बनाया गया था। उसमें उल्लेख था कि कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट और शेयर न तो आवंटित किए गए और न ही हस्तांतरित किए गए थे। बैलेंस शीट में दिखाई कंपनी का नेटवर्थ, संपत्ति एवं दायित्व की रकम काल्पनिक थी। कंपनी के खातों में कोई वास्तविक लेनदेन नहीं हुआ था।
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गिरियाशो कंपनी में निदेशक बनाई गईं सुमन शर्मा ने एक फरवरी 2017 को शपथपूर्वक बयान दिया था कि कंपनी के कार्यालय के रूप में जिस जगह का जिक्र किया है, वह उनका निजी आवास है तथा यहां कंपनी का कार्यालय संचालित नहीं है। नम्रता कंपनी के निदेशक बनाए धर्मेंद्र गुप्ता ने भी 10 मार्च और 14 मार्च 2017 को जांच एजेंसी को बयान में बताया था कि वह तो दोनों कंपनी बेचने वाले सुरेश कुमार गुप्ता के यहां कर्मचारी था, उसी के इशारे पर निदेशक बनाया गया। इन बातों का उल्लेख 2017 में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में किया गया था।

खनन माफिया इकबाल की और बढ़ेंगी मुश्किलें
बसपा के पूर्व एमएलसी और खनन माफिया मोहम्मद इकबाल की मुश्किलें अभी और बढ़ेंगी। चीनी मिल घोटाले में कार्रवाई के बाद अब खनन के मामलों में कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय एफआईआर दर्ज कर जांच कर रहा है।

सूत्रों का कहना है कि इकबाल ने अवैध खनन के जरिए हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की है। इससे उसने जमीनें खरीदीं, होटल व शैक्षिक संस्थान बनवाए हैं। ईडी इन संपत्तियों के स्रोत का पता लगा रहा है और जल्द ही बड़ी कार्रवाई कर सकता है।

सूत्रों का कहना है कि बसपा शासनकाल में कुल 21 चीनी मिलें बेची गई थीं। इनमें से बंद पड़ी सात चीनी मिलों को इकबाल ने खरीदा था। सीबीआई की प्रारंभिक जांच के बाद इन सात चीनी मिलों के मामले में 1100 करोड़ रुपये का घोटाला मिला था। इसके बाद एफआईआर दर्ज की गई थी। शेष 14 चीनी मिलों की जांच अब भी सीबीआई में लंबित है।
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दोनों कंपनियों में निदेशक हैं हाजी इकबाल के बेटे
- मेसर्स नम्रता कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में राकेश शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, सौरभ मुकुंद और मो. जावेद को निदेशक हैं। इनमें मो. जावेद हाजी इकबाल का बेटा है।
- मेसर्स गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड में सुमन शर्मा, धर्मेंद्र गुप्ता, मो. नसीम और मो. वाजिद निदेशक हैं। इनमें मो. वाजिद हाजी इकबाल का बेटा है।

शराब फैक्ट्रियों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत : रामनेरश
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शराब फैक्ट्रियों से हो रही टैक्स चोरी की घटना के बाद विभागीय मंत्री रामनेरश अग्निहोत्री ने कड़ी निगरानी की जरूरत बताई है। गन्ना संस्थान में आबकारी विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह से अंकुश नहीं है।

उन्होंने हरियाणा और दिल्ली की सीमा से लगे जिलों के अधिकारियों को अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अग्निहोत्री ने कहा कि आने वाले दिनों में होली और पंचायत चुनाव को देखते हुए आलाधिकारियों को पैनी नजर रखने की जरूरत है।

प्रदेश में पिछले दिनों हुई घटनाओं से विभाग और सरकार की छवि धूमिल हो रही है। ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जरूरत है। फ रवरी माह तक 25704 करोड़ रुपये का राजस्व विभाग को प्राप्त हुआ है जो पिछले वर्ष की अपेक्षा 218 करोड़ रुपये अधिक है।
 
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