बिजली बंबा बाईपास पर हवा में लटके जुर्रानपुर रेलवे ओवरब्रिज को जोड़ने के लिए नए सिरे से कवायद की गई है। यह पूरा प्रस्ताव नए सिरे से पीडब्लूडी से तैयार कराया गया है। ले आउट लगभग फाइनल है। यहां पुल को कनेक्ट करने के लिए प्रस्तावित रोड के लिए जमीन चाहिए, जिसके लिए मशक्कत की जा रही है।
यह है प्रकरण
दिल्ली रोड से हापुड़ रोड तक जाने वाले साढे़ सात किमी लंबे बिजली बंबा बाईपास पर जुर्रानपुर फाटक पिछले तीन साल से अजीब स्थिति में है। दरअसल यहां आए दिन जाम लगता है, तो प्रस्तावित हुआ कि रेलवे ट्रैक पर ओवरब्रिज बनेगा। रेलवे विभाग ओवरब्रिज बना भी चुका है। लेकिन यह पुल हवा में लटका है। वहां दोनों तरफ रोड ही नहीं है। रेलवे अपना काम कर चुका है। लेकिन एमडीए और स्थानीय प्रशासन यहां जमीन का अधिग्रहण नहीं कर पाया है। फाटक के दोनाें तरफ लगभग दो-दो सौ मीटर पर रोड निकलनी है, जो इस ओवरब्रिज को जोड़ेगी। यह पुल बनना जरूरी है। तभी इनर रिंग रोड का सपना भी साकार हो सकेगा। यही नहीं, अन्य प्रस्ताव भी यहां तभी आगे बढ़ेेंगे।
11 हेक्टेयर चाहिए जमीन
इस प्रस्ताव पर काम पूरा करने के लिए लगभग 11 हेक्टेयर जमीन चाहिए। इसमें चार गांवों के किसानों से जमीन का अधिग्रहण करना होगा। जाहिदपुर, बजौट, गुमी और जुर्रानपुर गांव के किसानों की जमीन ली जाएगी। कई बार किसानों से बात हुई। दरअसल इनमें जाहिदपुर शहरी क्षेत्र में है जबकि अन्य गांव ग्रामीण क्षेत्र में हैं।
चार गुना मुआवजे का खेल
यहां मुआवजे की दर को लेकर प्रस्ताव अटका है। तीन गांवों को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा जबकि एक को दोगुना मुआवजा देना होगा। रही सही कसर सरकार ने पूरी कर दी। दरअसल भू अधिग्रहण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था, जो खारिज हो चुका है। सरकार का कहना है कि जमीन की सीधी खरीद करो। लेकिन किसान नई भू अधिग्रहण नीति से ही जमीन देने की मांग पर अड़े हैं। इस नीति में शहरी क्षेत्र में सर्किल रेट का दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र में सर्किल रेट के चार गुना मुआवजे का प्रावधान है।
यह है सर्किल रेट
- जुर्रानपुर तथा गुमी : 1771 रुपये प्रति वर्ग मीटर
- बजौट : 1780 रुपये प्रति वर्ग मीटर
- जाहिदपुर : 3240 रुपये प्रति वर्ग मीटर
अब नई कवायद
एमडीए के अधिकारियों ने मंडलायुक्त तथा अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर इस पर नई कवायद शुरू की, जो आखिरी दौर में आ गई है। इस मशक्कत के तहत इस पूरे प्रस्ताव को पीडब्लूडी के जरिए कराया जा रहा है। दरअसल यह इनर रिंग रोड का हिस्सा है और इसे भी पीडब्लूडी को दिया जा रहा है। इस बाबत ले आउट तैयार करा लिया गया है। एमडीए अधिकारियों के मुताबिक जमीन एमडीए देगा और इस प्रस्ताव को भले ही शासन ने गिरा दिया हो, पर यहां से काम होगा। इस बाबत शासन को भी सूचना दी गई है कि नए सिरे से काम हो रहा है। अहम बात यह है किसानों के साथ कई बार बैठक हो चुकी है। माना जा रहा है कि चुनाव बाद इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।