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हवा हवाई हुआ निशुल्क शिक्षा अभियान

Wed, 06 Jul 2016 01:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम हवा में उड़ता दिखाई दे रहा है। विभाग ने नया सत्र अप्रैल माह से शुरू कर दिया था। लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह तक भी स्कूलों में बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी। विभाग की तरफ  से किताबों की व्यवस्था भी होती दिखाई नहीं पड़ रही। ऐसे में बच्चों को बिना किताबों के स्कूल जाना पड़ रहा है।
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निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत कक्षा एक से आठ तक के सभी बच्चों को निशुल्क शिक्षा का अधिकार दिया गया। जिसमें छह वर्ष से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा अनिवार्य की गई। जिसमें नि:शुल्क किताबें और ड्रेस की व्यवस्था की गई। साफ  निर्देश दिए गए कि किसी भी स्कूल में शिक्षा के लिए किसी भी बच्चे से कोई भी पैसा नहीं लिया जाएगा। दाखिला भी मुफ्त होगा। वार्षिक परीक्षा के दौरान बच्चों को फेल भी नहीं किया जा सकता। जिले में कक्षा एक से आठ तक 1 लाख 81 हजार 73 बच्चे हैं।
नया सत्र 1 अप्रैल 2016 से शुरू किया गया था। जिसमें बच्चों का दाखिला भी हो गया। ग्रीष्म अवकाश के बाद दो जुलाई से स्कूल भी खुल चुके हैं। लेकिन परीषदीय विद्यालयों के बच्चों को बिना किताबों के स्कूल जाना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि पहली बार हुआ है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक विभाग के पास किताबें नहीं पहुंची हैं। जबकि पहले जून माह में ही किताबें मिल जाती थीं। एक जुलाई से स्कूलों में किताबों का वितरण शुरू होता था।
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जिले में स्कूलों की संख्या
प्राथमिक विद्यालय - 910
उच्च प्राथमिक विद्यालय - 432
अनुदानिक विद्यालय - 17
अनुदानिक उच्च प्राथमिक विद्यालय - 45
राजकीय विद्यालय - 12
अनुदानिक मदरसे कक्षा आठ तक - 3
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय - 5

 किताबें भी नहीं खरीद सकते:
कक्षा एक से आठ तक जो नि:शुल्क किताबें बच्चों को दी जाती हैं, वह बेसिक शिक्षा विभाग के अलावा कहीं से नहीं मिल सकती। जो न तो दुकानों पर मिलती हैं और ही बेची जातीं। किताबों के बाहरी पृष्ठ पर नि:शुल्क लिखा हुआ होता है।
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