हस्तिनापुर। मानसून के अंतिम दिनों में हुई भारी बारिश से सेंक्चुअरि क्षेत्र में मौजूद वेटलैंड की झीलों में प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों के लिए इस बार पर्याप्त भोजन मिलेगा। इस बात का अंदाजा वेटलैंड क्षेत्र में देखे जा रहे प्रवासी पक्षियों के झुंड से लगाया जा सकता है। वन विभाग के अधिकारी भी इस बार यहां पिछले वर्षों से अधिक पक्षियों के पहुंचने की संभावना जता रहे हैं।
हस्तिनापुर सेंक्चुअरि पूरे पश्चिम में सबसे ज्यादा वेटलैंड को संजोने वाली जगह है। यहां एक या दो नहीं, बल्कि 16 वेटलैंड ऐसे हैं, जहां हजारों पक्षी हर साल सर्दियों के समय पहुंचते हैं। इनमें सबसे बेहतर होने का दर्जा बिजनौर की हैदरपुर वेटलैंड को मिला है।
हस्तिनापुर वन्य अभ्यारण क्षेत्र में मेरठ, बिजनौर, हापुड़ मुजफ्फरनगर, अमरोहा जिलों से होकर गुजरने वाली हस्तिनापुर सेंक्चुअरि प्रवासी पक्षियों के लिए बेहतरीन ठिकाना है। इसका क्षेत्र अधिकांश गंगा के दोनों किनारे पर है। ऐसे में पक्षियों के लिए दलदल, कम गहरा पानी, घास के मैदान, रुकने को पर्याप्त जगह और उनके लिए हर तरह का भोजन यहां उपलब्ध है। जिसके चलते यह वेटलैंड विदेशी प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों को लुभाता है और वह हजारों मिल का सफर कर यहां पहुंचते हैं। हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में दो लाख से भी ज्यादा प्रवासी पक्षी हर साल यहां आते हैं। यहां पर 16 ऐसे वेटलैंड वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ चिह्नित कर चुका है, जहां प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। इस बार मौसम के अंत में अधिक बारिश होने से वेटलैंड क्षेत्र की झीलों में अधिक पानी भरा होने से भरपूर भोजन है यहां पर प्रवासी पक्षियों के झुंड देखे जा रहे हैं जो भोजन के लिए विचरण करते हैं जिससे वन विभाग के अधिकारी भी उत्साहित हैं। हस्तिनापुर वेटलैंड क्षेत्र में 300 से अधिक प्रजाति के प्रवासी पक्षी प्रतिवर्ष पहुंचकर प्रजनन करते हैं और अपने कुनबे को बढ़ाकर वापस मार्च अप्रैल माह में वापस लौटते हैं।
आखिर क्या है हस्तिनापुर का वेटलैंड
वन अभ्यारण क्षेत्र में मौजूद वेटलैंड जिसे आद्रभूमि भी कहा जाता है, यहां झील, दलदल, रुका हुआ पानी जहां मछलियों से लेकर छोटे-छोटे जलीय जीव, घास के छोटे या बडे़ मैदान आदि मौजूद होते हैं। हस्तिनापुर सेंक्चुअरि में ऐसे 16 वेटलैंड हैं, जहां पर विदेशी प्रवासी पक्षियों का रहवास रहता है। इन स्थानों पर देसी और विदेशी पक्षियों को पर्याप्त भोजन मिलता है जिसके चलते यह प्रतिवर्ष सर्दी का मौसम यहीं पर बिताते हैं।