मेरठ की हस्तिनापुर सीट ने अपना इतिहास कायम रखा। इस क्षेत्र की जनता ने जिस पार्टी के उम्मीदवार को विधायक चुना उसी पार्टी की सरकार प्रदेश में आती है। इस बार यहां से भाजपा उम्मीदवार दिनेश खटीक चुनावी मैदान में बाजी मार गए तो सूबे में भी भाजपा ने सभी का सूपड़ा साफ कर दिया।
हस्तिनापुर सीट सन् 1957 से प्रभाव में आई थी। तब से 1967 तक यहां कांग्रेस के विधायक चुने गये और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी। 1967 के चुनाव में ही यह सीट सुरक्षित हो गई थी। वर्ष 1969 में परिवर्तन आया। भारतीय क्रांति दल के आशाराम इंदू यहां से विधायक बने तो उधर इसी दल की सरकार प्रदेश में बनी। चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। 1974 में फिर यह सीट रेवती शरण मौर्य ने कांग्रेस से जीती और प्रदेश में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनीं। इत्तेफाक देखिए कि अगला चुनाव रेवतीशरण मौर्य 1977 में जनता पार्टी से लड़े और जीत गए। प्रदेश में सरकार भी उस साल जनता पार्टी की ही बन गई। उसके बाद फिर यहां कांग्रेस राज शुरू हुआ। एक बार यहां थोड़ा परिवर्तन तब आया जब वर्ष 1996 में इस सीट से अतुल कुमार खटीक निर्दलीय रूप में लड़े और चुनाव जीत गए। ऐसे में सूबे में सत्ता भी किसी दल की नहीं बनी और राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। हालांकि इसके बाद अपवाद यह रहा कि वर्ष 2002 में चुनाव हुए तो प्रभुदयाल वाल्मीकि सपा से चुनाव लडे़ और जीत गए और सरकार बनी बसपा भाजपा गठबंधन की। बावजूद इसके यह गठबंधन एक साल नहीं चला और फिर से सपा ने जोड़तोड़ करते हुए सरकार बना दी। इसके अलावा 2007 में यह सीट बसपा के पास चली गई और सरकार भी बसपा की ही बनी। 2012 में सपा ने यह सीट जीती और एक बार फिर प्रदेश में सपा की सरकार बनीं। अब फिर से भाजपा से यहां प्रत्याशी जीता तो सरकार भी भाजपा की ही बन रही है।
ये चुने गए हैं अब तक विधायक
1957 विशंभर सिंह, कांग्रेस
1962 पीतम सिंह, कांग्रेस
1967 आरएल श्याक, कांग्रेस
1969 आशाराम इंदू, भारतीय क्रांति दल
1974 रेवतीशरण मौर्य, कांग्रेस
1977 रेवतीशरण मौर्य, जनता पार्टी
1980 झग्गड़ सिंह, कांग्रेस
1985 हरशरण सिंह, कांग्रेस
1996 अतुल कुमार, निर्दलीय
2007 योगेश वर्मा, बसपा
2012 प्रभुदयाल वाल्मीकि, सपा
2017 दिनेश खटीक, भाजपा