दिल्ली हाईकोर्ट में एनएचआरसी की अपील पर केस का रुख इसी साल 28 मार्च को तब मुड़ा, जब घटना के समय पुलिस लाइन में तैनात रणवीर सिंह विश्नोई (78) पेश हुआ और उसने अतिरिक्त साक्ष्य के तौर पर पुलिस की जीडी पेश की।
पीएसी के पीले रंग ट्रक संख्या यूआरयू 1493 का पुलिस लाइन से मूवमेंट, उसमें सवार पीएसी जवानों के नामों का आरोपियों के नामों से मेल खाना, ट्रक की लॉग बुक से उसके हाशिमपुरा से मुरादनगर तक जाने के साक्ष्यों की पुष्टि हुई।
41वीं वाहिनी पीएसी के इन जवानों को शस्त्रागार से जारी असलहे और गोलियों की संख्या के साथ ही उनके प्रयोग के साक्ष्यों ने परिस्थितियों को साबित किया। यह बात संदेह से परे सिद्ध नहीं हो पाई कि हाशिमपुरा से 50 लोगों को अगवा करने वाले पीएसी के जवान नहीं थे।
जीडी में 17 जवानों के नाम
जीडी में पीएसी के 17 जवानों के नाम अंकित हैं। जिनमें प्लाटून कमांडर सुरेंद्र पाल सिंह, हेड कांस्टेबल निरंजन लाल, कमल सिंह, श्रवण कुमार, कुश कुमार, एससी शर्मा, कांस्टेबल ओम प्रकाश, समीउल्लाह, जयपाल, महेश प्रसाद, राम ध्यान, लीलाधर, हमवीर सिंह, कुंवर पाल, बुद्ध सिंह, बसंत वल्लभ और नायक रामबीर सिंह हैं।
तत्कालीन गृह राज्यमंत्री पी. चिदंबरम को राहत
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाशिमपुरा नरसंहार मामले में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री पी. चिदंबरम को राहत दे दी है। अदालत ने बुधवार को मामले में उनकी भूमिका की जांच करने संबंधी याचिका पर कोई आदेश नहीं दिया है। भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने याचिका में तर्क रखा था कि जिन पीएसी जवानों पर मुकदमा चल रहा है, उन्होंने केवल अपने वरिष्ठ अधिकारी के आदेश का पालन किया था।
चिदंबरम उस समय केंद्रीय गृह राज्यमंत्री थे। ऐसे में उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। कोर्ट ने सुब्रह्मण्यम स्वामी की यूपी पुलिस की सीबीसीआईडी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की दलील को मान लिया है, लेकिन जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग को खारिज कर दिया।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/