टीम ने मवाना पुलिस की सहायता ली और क्लीनिक पर छापा मारा। छापा लगते ही वहां मौजूद चिकित्सक और अन्य कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। इस दौरान एक आरोपी वहां से भाग गया। डॉ. अंविता कौशिक ने बताया कि टीम ने ही गर्भवती महिला को रुपये दिए थे जिन पर डीएम, मजिस्ट्रेट, सीएमओ के हस्ताक्षर थे। टीम ने छापेमारी के दौरान अरविंद, शारदा, मवाना निवासी दाई सावित्री, तिगरी गांव निवासी आशा सीमा, बिढौली शामली निवासी श्रवण, रवि निवासी थाना गंगोह को पकड़ लिया।
मौके से टीम ने एक मशीन, एक टैबलेट, व 30 हजार रुपये में से 26 हजार रुपये बरामद किए। सभी के मोबाइल कब्जे में ले लिए। पकड़े गए सभी आरोपितों को मवाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। टीम ने सभी के खिलाफ तहरीर दी। एसएसआई पंकज शर्मा ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
हरियाणा टीम पास, मेरठ फेल
हर बार की तरह इस बार भी हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ही यह छापेमारी की गई। पुलिस स्वास्थ्य विभाग एक भी छापेमारी कर भ्रूण लिंग परीक्षण नहीं पकड़ सका है। मेरठ का स्वास्थ्य विभाग इसके लिए हरियाणा की टीम के नेटवर्क को वजह बताता है।
लिंग परीक्षण के लिए लाई गई अत्याधुनिक मशीन के जरिए परीक्षण करने वालों ने जिले में अपना बड़ा नेटवर्क स्थापित कर लिया है। पकड़े गए छह आरोपितों ने पूछताछ में अन्य लोगों के भी नाम उजागर किए हैं। अब टीम इन लोगों तक पहुंचने की तैयारी में जुट गई है।
मवाना में लिंग परीक्षण पकड़े जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी पांच बार हरियाणा की टीम छापा मारकर लिंग परीक्षण करने वालों को दबोच चुकी है। शनिवार को मेरठ व सोनीपत की टीम के संयुक्त रूप से की गई छापेमारी में खास बात यह भी है कि स्वास्थ्य विभाग के ही नुमाइंदे इस गोरखधंधे से जुड़े हुए हैं। छापेमारी के दौरान पकड़ी गई मवाना सीएचसी की आशा सीमा इसका प्रमाण है।
वहीं, थाने लाए गए आरोपी अपने को निर्दोष बताते रहे और अन्य लोगों के नाम लेते रहे। इसमें मवाना समेत जिले के कई झोलाछाप चिकित्सकों के नाम सामने आए। इस मामले की जानकारी दिल्ली के एक अस्पताल में काम करने वाले कर्मचारी ने हरियाणा की टीम को दी थी। डॉ. अंविका कौशिक और डॉ. आदर्श शर्मा को मुखबिर योजना को सफल बनाने के लिए राष्ट्रपति पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है।
मवाना लिंग परीक्षण के दौरान टीम ने एक अत्याधुनिक मशीन प्रोबो व टैबलेट पकड़ा है। इस मशीन की खास बात यह है कि यह मोबाइल से कुछ बड़ी है और इसमें कोई तार नहीं है। इस मशीन को टैबलेट से आसानी से ब्लूटूथ के जरिए जोड़ा जा सकता है। पहली बार है जब टीम को इस तरह की मशीन मिली।