सरकार द्वारा सोना रखने की सीमा तय करने के निर्णय से महिलाएं खुश हैं। महिलाओं के अनुसार इतना सोना हमारे लिए बहुत है। कई लोग ऐसे हैं जिनके पास इतना सोना भी नहीं हैं। इस नियम से दहेज के नाम पर जो भरपूर सोना लिया जाता है उस पर भी रोक लगेगी। वहीं चोरी, स्नैचिंग का डर नहीं रहेगा।
कालेधन पर लगेगा नियंत्रण
सीमित मात्रा में ही सोना घर पर रख पाएंगे तो इससे कालेधन पर रोक लगेगी। क्योंकि लोग पहनने के अलावा कालाधन खपाने के लिए सोने में निवेश करते रहते हैं। लेकिन अब तय सीमा से ज्यादा सोना मिला तो कार्यवाही होगी। लोगों ने सोने को स्टेटस सिबंल बना लिया था वो कम होगा।- रम्मू शर्मा, शिक्षिका दीवान पब्लिक स्कूल
भविष्य के लिए बहुत अच्छा
500 ग्राम सोना रखना कोई कम नहीं है। जरूरत की ज्वैलरी इतने सोने में आराम से बन जाती है। इसलिए कोई परेशानी नहीं होगी। अच्छी बात यह कि इससे लोगों की जरूरतों पर नियंत्रण होगा। हमारे बच्चों के भविष्य के लिए भी अच्छा रहेगा। उन्हें सीमित आय में जीने की आदत पडे़गी।- निशी मित्तल गृहिणी
जितनी जरूरत, उतना मिलेगा
यह निर्णय बहुत अच्छा है इसलिए ज्वैलरी पहनने की कोई परेशानी नहीं होगी। अच्छा है कि ज्यादा ज्वैलरी नहीं होगी तो चोरी, स्नैचिंग का डर नहीं रहेगा। लोग जरूरत का ही सोना खरीदेंगे। लोगों क ो डर भी रहेगा। दहेज में जो लोग खूब सारे गहने मांगते हैं वो भी बंद हो जाएगा।- डॉ. सपना अग्रवाल, महिला चिकित्सक
अब आराम से होगी बेटियों की शादी
हमारे समाज में बेटियों क ो बोझ इसलिए समझा जाता है, उनकी शादी में काफी दहेज चाहिए। नकद और सोना भी काफी चाहिए। लेकिन सरकार के इस नियम के बाद किसी पर भी अतिरिक्त सोना मिला तो आयकर की कार्यवाही होगी। इसलिए लोग डर से ज्यादा सोना दहेज में भी नहीं मांगेंगे। बेटियों की शादी हर माता-पिता आराम से कर पाएंगे। बेटी बोझ नहीं रहेगी।- पूनम छात्रा
रोजाना ज्वैलरी बदलने वालों को दिक्कत
सरकार के इस निर्णय से आम परिवार की महिलाओं को कोई परेशानी नहीं होगी। उन लोगों को सबक जरूर है, जो महिलाएं हर रोज नई-नई ज्वैलरी पहनकर दिखावा करती हैं। लेकिन अब दूसरी महिलाएं उन्हें देखकर गिल्टी महसूस नहीं करेंगी। रोजाना ज्वैलरी बदलने का भी झंझट नहीं रहेगा।- सुमति सिंह, प्रिंसिपल
सवाल जो अभी हैं मन में
. सासू मां के या पुश्तैनी सोने का क्या करेंगे
. दहेज और गिफ्ट में मिली ज्वैलरी क ा क्या होगा
. जो सोना लॉकर में हैं उसका क्या होगा
पत्नी अस्पताल में, पति बैंक की ड्यूटी पर
बैंक में काम का लोड और परिवार की जिम्मेदारी। इन दिनों बैंकों में 12-12 घंटे काम चल रहा है। लेकिन इसके बावजूद बैंक कर्मचारियों और अफसरों के माथे पर शिकन तक नहीं है।
रेलवे रोड स्थित एसबीआई ब्रांच में बृहस्पतिवार सुबह 11:30 बजे शाखा प्रबंधक सुजीत कुमार के पास उनकी पत्नी ने कॉल कर बताया कि मेरी तबियत अचानक खराब हो गई है। मुझे अस्पताल में एडमिट कराया गया है। पत्नी ने उन्हें तुरंत नोएडा आने को कहा। लेकिन सुजीत बोले कि यहां पेंशन और वेतन वालों की लाइन लगी है। ऐसी हालत में आना संभव नहीं होगा। सुजीत ने डॉक्टर को बैंक की स्थिति बताते हुए कहा कि वे बेहतर इलाज करें। लेकिन मेरा आना संभव नहीं हो सकेगा। इसके बाद सुजीत शाम को अपने उच्चाधिकारियों की अनुमति लेकर नोएडा रवाना हुए। एसबीआई के रीजनल मैनेजर प्रथम राजेश कुमार सिंह ने बताया कि स्टाफ की मेहनत वास्तव में सराहनीय है।
दवा लेकर लगे काम में
रेलवे रोड एसबीआई के कैशियर राजेश जैन की बृहस्पतिवार दोपहर अचानक तबियत खराब हो गई। वह अपनी चेयर पर निढाल से हो गए। चिकित्सक और स्टाफ ने उन्हें आराम करने को कहा। लेकिन दवा लेने के बाद वह फिर से बैंक में अपने काम में जुट गए।
तबियत खराब फिर भी काम
इसी ब्रांच में मेसेेंजर राम प्यारे बैंकों में जमा हो रहे कैश की गिनती कर उनके बंडल बना रहा है। नोटों की डस्ट से उसकी कुछ दिन पहले तबियत खराब हो गई थी। वह लगातार काम पर जुटा है। सभी का यह मानना है कि लगातार काम करके लोगों की परेशानियों को कम किया जा सकता है।