मेरठ। कोराना का भय दिखाकर गन्ना विभाग ने पेराई सत्र 2020-21 की गन्ना सुरक्षण बैठक से हाथ खड़े कर दिए हैं। वह किसानों की आवाज सुने बिना ही गन्ना सुरक्षण आदेश जारी करने में जुटा है। इसके लिए उप गन्ना आयुक्तों और जिला गन्ना अधिकारियों को लखनऊ बुलाया है। इस फैसले से विपक्षी दलों और किसान संगठनों में रोष है।
गन्ना विभाग सुरक्षण आदेश के जरिए मिलों को आवश्यकतानुसार गन्ना और क्रय केंद्रों का आवंटन करता है। इससे पहले विभाग किसान प्रतिनिधियों के साथ गन्ना सुरक्षण बैठक में किसानों के सुझाव व समस्या पर विचार करता है। इस बार कोरोना का भय दिखाकर सुरक्षण बैठक से हाथ खड़े कर दिए हैं। शायद उच्चाधिकारी नहीं चाहते कि किसान अपनी बात रख सके।
रैलियों से कोरोना का खतरा नहीं
चुनाव के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की रैलियों से कोरोना का खतरा नहीं है। सुरक्षण बैठक से खतरा है। सरकार किसानों को खत्म करने पर तुली है। किसान समय आने पर जवाब देगा।-डॉ. राजकुमार सांगवान, प्रदेश संगठन मंत्री रालोद
किसानों का विकास नहीं चाहती सरकार
सरकार और नौकरशाह किसानों का विकास नहीं चाहते हैं। किसानों के साथ सुरक्षण बैठक नहीं करना सरकार की विफलता है।-सरदार वीएम सिंह, अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन
किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे
पहले सुरक्षण बैठकें मंडल स्तर पर होती थीं। उसे लखनऊ मुख्यालय पर की जाने लगी। अब कोरोना का भय दिखाकर वहां भी नहीं कर रहे हैं। किसान इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।-राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू
मॉडल गन्ना क्रय केंद्रों का होगा विरोध
शुगर मिल के पांच किलोमीटर दायरे में मॉडल क्रय केंद्र बनाने की योजना है। ये रात में भी खरीद करेंगे। छोटे सेंटरों के किसानों को गन्ना लेकर वहां जाना होगा। भाकियू के जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी, भारतीय किसान आंदोलन के अध्यक्ष कुलदीप त्यागी, भाकियू के संगठन मंत्री संजय दौरालिया ने मॉडल केंद्र नहीं लगने देने का एलान किया है।