एक जुलाई को देश में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स यानि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को एक साल पूरा होने जा रहा है। जीएसटी व्यापारियों और जनता के लिए काफी उतार चढ़ाव भरा रहा। वहीं, टैक्स वसूली करने वाले विभागों (वाणिज्य कर और सेंट्रल जीएसटी) की बल्ले-बल्ले हो गई। शुरुआती दिक्कतों के बाद सरकार ने टैक्स स्लैब में कुछ बदलाव किए। इसके बावजूद सेंट्रल जीएसटी ने सेंट्रल एक्साइज के मुकाबले 1197.56 करोड़ रुपये ज्यादा टैक्स वसूली की है। दूसरी तरफ, वाणिज्य कर विभाग ने वैट के मुकाबले 112 करोड़ रुपये ज्यादा टैक्स वसूला है।
सेंट्रल जीएसटी जब सेंट्रल एक्साइज था, तब जुलाई 2016 से मार्च 2017 तक 5872.60 करोड़ रुपये टैक्स वसूला गया था, जबकि जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई 2017 से मार्च 2018 तक 7070.16 करोड़ रुपये टैक्स वसूला गया है। विभाग पिछले साल अप्रैल, मई और जून के सेंट्रल एक्साइज के तहत वसूले गए टैक्स और इस बार जीएसटी के तहत वसूले गए टैक्स का अवलोकन कर रहा है। इसकी रिपोर्ट जुलाई माह के मध्य तक आ पाएगी। सेंट्रल जीएसटी, जिसे सीजीएसटी भी कहते हैं, इसके तहत मेरठ जोन में मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, हापुड़, बुलंदशहर और मुरादाबाद जिले आते हैं। दूसरी तरफ, वाणिज्य कर विभाग ने वैट के तहत जुलाई 2016 से मई 2017 तक 702.08 करोड़ रुपये टैक्स वसूली की थी, जबकि इस बार जीएसटी लगने के बाद जुलाई 2017 से मई 2018 तक 814.08 करोड़ रुपये टैक्स वसूला है। यह वृद्धि करीब 15.95 प्रतिशत की है। वाणिज्य कर विभाग में अप्रैल और मई माह में ही करीब 26 प्रतिशत टैक्स की बढ़ोतरी हुई है। वैट के तहत पिछले साल अप्रैल और मई में 143.90 करोड़ रुपये वसूला गया था, वहीं इस बार जीएसटी के तहत अप्रैल और मई माह में 181.55 करोड़ रुपये टैक्स वसूला गया है। वाणिज्य कर विभाग के तहत मेरठ और बागपत जिले आते हैं।