जीएसटी का असर कांवड़ पर भी दिखाई दे रहा है। जो कांवड़ पांच हजार रुपये में तैयार होती थी अब वह आठ से दस हजार रुपये में तैयार हो रही है। बांस से लेकर अन्य सभी सामान महंगा हो गया है।
सावन का पहला सोमवार 10 जुलाई को है। कांवड़ मेला शुरू हो चुका है। दूसरे प्रदेशों के कांवड़ियां हरिद्वार से गंगा जल लेकर अपने गंतव्य की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं शहर के बाजारों में केसरिया रंग दिखने लगा है। कांवड़ पर महंगाई को लेकर अभिषेक अग्रवाल से बात की गई तो इनका कहना है कि वह प्रतिवर्ष 18 फीट ऊंची और 16 फीट लंबी कांवड़, जिसका वजन लगभग 120 किलो होता है हरिद्वार से गंगाजल के साथ लाते हैं। कांवड़ मेरठ में ही तैयार की गई है। पिछले साल कांवड़ पर 70 हजार रुपये खर्च हुए थे, लेकिन इस बार खर्च का आंकड़ा एक लाख से भी ऊपर पहुंच रहा है। कांवड़ के ऊपर अन्य खर्च जैसे ट्रैक्टर, जनरेटर, डीजे आदि पर आने वाले खर्च को जोड़ा जाए तो लगभग पांच लाख रुपये का खर्च बैठता है। कांवड़ पर सीधे सीधे जीएसटी का असर है। कांवड़ में इस्तेमाल होने वाली जो लाठी पिछले साल 30 रुपये की थी वह इस बार 50 रुपये की है। बांस पिछले साल 25 रुपये का था, वह इस साल 40 रुपये का है। कांवड़ का कपड़ा जो 200 रुपये मीटर था वह 300 रुपये मीटर है। इस प्रकार गोटा, कंडी, तोते आदि पर भी महंगाई की मार है।