वस्तु एवं सेवाकर विभाग की जांच में छह फर्जी फर्मों का खुलासा हुआ। इन फर्मों से 78.3 करोड़ रुपये के बिल जारी कर 14.29 करोड़ रुपये की आईटीसी की हेराफेरी की गई। विभाग इस आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) क्लेम को वापस लेने की प्रक्रिया में जुट गया है। इनमें से एक फर्म का पंजीयन एक व्यक्ति से नौकरी के नाम पर लिए गए प्रपत्रों के आधार किया गया है।
राज्यकर विभाग के अपर आयुक्त श्रेणी-1 सत्यपाल सिंह ने बताया कि विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा की पांच टीमों द्वारा की गई जांच में छह अस्तित्वहीन फर्मों का खुलासा हुआ। इन अस्तित्वहीन फर्मों ने कूटरचित प्रपत्रों का उपयोग कर जीएसटी पंजीयन प्राप्त किया है। ये सभी फर्म केंद्रीय क्षेत्राधिकार के अंतर्गत पंजीकृत है।