हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा के सम्मुख चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 26 वें दिन 130 परिवारों द्वारा विधान की मांगलिक क्रियाएं की गई। शांतिधारा करने व सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य दर्श गंगवाल, अंशिक गंगवाल, डाॅ. अनिल गंगवाल, सिखा गंगवाल को प्राप्त हुआ।
मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि वृक्ष कार्बन-डाई ऑक्साइड ग्रहण और हमें ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। गाय घास आदि खाकर हमें दूध प्रदान करती हैं। वृक्ष अपने पत्तों को एक समय स्वयं छोड़ देता है। हम भी आहार करते हैं तो निहार होता है, तभी मनुष्य स्वस्थ रहता है। अगर हम ग्रहण तो करते रहें और उसको छोड़ें नहीं तो हम अस्वस्थ हो जाएंगे। इसी प्रकार से धन अर्जन करने और वस्तुओं के संग्रह के मूल में राग है। जबकि त्याग हमें परिग्रह से मुक्ति दिलाता है। जीवन में त्याग की महिमा सृष्टि के आरंभ से ही रही है। जैन धर्म और जैन समाज दान शीलता का आदर्श उदाहरण है। सच्चा धनपति जोड़ने में नहीं, छोड़ने में स्वयं को भाग्यशाली समझता है।
महाराज ने कहा कि संचयवृत्ति, परिग्रह पाप है। जोड़कर रख लो चाहे लाख हीरे-मोती, मगर याद रखना कफन में जेब नहीं होती। इसलिए हे भव्य आत्माओं त्याग की प्रवृत्ति में आगे बढ़ो और अपने धन का धर्म, राष्ट्र और समाजहित के लिए उसका सदुपयोग करो।
विधान में पधारे शशि प्रभा जैन, संजय जैन, सीमा जैन, विशाल जैन, रिया जैन, अंकित जैन, लालचंद जैन, ध्रुव जैन, विकास जैन, विवेक जैन आदि परिवारों द्वारा विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार जैन, उपाध्यक्ष सतेन्द्र कुमार जैन, अभय जैन, शशांक जैन, विजय कुमार जैन, अतुल जैन, अनिल कुमार जैन, वीरेन्द्र कुमार जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, अतुल जैन, गुरमीत, अनुपम, कमल जैन, सुदर्शन जैन, शुभम जैन आदि का सहयोग रहा।