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इंगलिश मीडियम नहीं! ये हैं यूपी के सरकारी स्कूल, सुविधाएं जानकर बदल जाएगी आपकी सोच, देखें तस्वीरें

Thu, 02 Aug 2018 07:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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शामली का सरकारी स्कूल - फोटो : अमर उजाला
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सरकारी स्कूलों का नाम आते ही स्कूलों की एक बदहाल सी तस्वीर सामने आ जाती हैं, लेकिन यूपी के शामली में उच्च प्राथमिक स्कूल व प्राथमिक स्कूल प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों के लिए मिसाल बन रहे हैं। इन स्कूलों के आगे निजी स्कूलों की चमक फीकी पड़ रही है। कई मामलों में तो यह अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों का मुकाबला करते नजर आते हैं। और यह सब संभव हुआ है योजनाओं के सफल क्रियान्वयन और अध्यापकों के प्रयासों से।

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आइए जानते हैं आखिर क्यों चर्चा में ये स्कूल  :-

     
 

सुधर सकती है सरकारी स्कूलों की व्यवस्था

खाना खाने से पहले हाथ धोते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
सूबे की सरकार और अधिकारियों की मंशा सही हो तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था भी सुधर सकती है। सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्राइवेट स्कूलों जैसा माहौल मिल सकता है। परिषदीय विद्यालयों में चयनित किए गए मॉडल स्कूलों में से जिले में ऐसे कई सरकारी स्कूल हैं, जिनकी चमक दमक प्राइवेट स्कूलों जैसी है। शामली के गांव गढ़ीश्याम और भाजू के उच्च प्राथमिक स्कूल गांव गढ़ीश्याम का उच्च प्राथमिक स्कूल, भाजू गांव का उच्च प्राथमिक स्कूल, लांक और जगनपुर के प्राथमिक स्कूल जनपद के अन्य सरकारी स्कूलों से अलग दिखते हैं।

गढ़ीश्याम का उच्च प्राथमिक स्कूल बना मिसाल

स्कूल का स्वच्छ शौचालय - फोटो : अमर उजाला
गढ़ीश्याम के उच्च प्राथमिक स्कूल में वर्ष 2015 में 18 बच्चे पढ़ते थे। प्रधानाध्यापक ओमवीर ने यहां कार्यभार संभालने के बाद स्कूल की दशा सुधारने को अपना मकसद बनाया। अपने दो बच्चों का दाखिला भी इसी स्कूल में कराया। इस दौरान ओमवीर ने अपने वेतन से करीब ढाई लाख रुपये विद्यालय पर खर्च कर दिए। ग्राम प्रधान के पति संजीव कुमार सहित अन्य लोगों ने भी सहयोग किया। अब विद्यालय में 122 बच्चे पढ़ रहे हैं।

गांव लांक और जगनपुर के स्कूल भी पीछे नहीं  

स्कूल में मिलता है ताजा और पौष्टिक भोजन - फोटो : अमर उजाला
शामली क्षेत्र के गांव लांक स्थित आदर्श प्राथमिक अंग्रेजी माध्यम स्कूल पिछले 2014 से अंग्रेजी माध्यम से संचालित है। वहीं, पिछले वर्ष से एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराई जा रही है। प्रधानाध्यापिका सुवासिनी ने बताया कि स्कूल में प्रोजेक्टर से पढ़ाई कराई जा रही है। नवाचार परीक्षा में छात्र आदित्य ने जिला टॉप किया था। वहीं, कैराना क्षेत्र के गांव जगनपुर स्थित प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक विजय कुमार शर्मा ने बताया कि स्कूल में प्राइवेट स्कूल जैसा बनाने का प्रयास किया गया है।

बच्चे सलीके से बैठकर करते हैं भोजन

स्कूल में खाना खाते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
उधर, गांव भाजू स्थित उच्च प्राथमिक स्कूल में बच्चे मिड-डे मील भी डाइनिंग टेबल पर खाते हैं। प्रधानाध्यापक विरेंद्र ने बताया कि स्कूल में यह सुविधा कृषि भूमि का ठेका छोड़ने से प्राप्त धनराशि से कराई है। स्कूल में शौचालय भी काफी साफ सुथरे हैं।

 
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स्कूल में प्रोजेक्टर से होती है पढ़ाई

प्रोजेक्टर पर पढ़ाई करते बच्चे - फोटो : अमर उजाला
यहां प्रोजेक्टर से पढ़ाई और कंप्यूटर का ज्ञान बच्चों को दिया जा रहा है। अंग्रेजी माध्यम से एनसीईआरटी की किताबों से शिक्षण कराया जा रहा है। दोपहर दो से पांच बजे तक अतिरिक्त क्लास भी चलती है। उन्होंने बताया कि नवाचार परीक्षा के दौरान 17 विषयों में स्कूल के बच्चों ने टॉप किया था। मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में 24 गोल्ड मेडल जीते हैं। सवाल यह है कि जब यह स्कूल चकाचक हो सकते हैं, तो जिले के अन्य सरकारी स्कूल क्यों नहीं, ताकि बच्चों को पढ़ने के लिए बेहतर माहौल दिया जा सके। 

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