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Meerut News: शासनादेश बेअसर, पिठलोकर और अटेरना सचिवालय में तय समय तक नहीं पहुंचे लेखपाल

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दौराला - बंद पड़ा ग्राम सचिवालय वलीदपुर। स्रोत : संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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सरधना। शासन की ओर से ग्राम पंचायत सचिवालयों में लेखपालों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। क्षेत्र के दो ग्राम पंचायत सचिवालयों की पड़ताल में बृहस्पतिवार को तय समय तक लेखपाल अनुपस्थित मिले, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली।
ग्राम पंचायत पिठलोकर सचिवालय में दोपहर 12:50 बजे तक हल्का लेखपाल मौजूद नहीं मिले। अटेरना ग्राम पंचायत सचिवालय में भी दोपहर 1:00 बजे तक लेखपाल नहीं पहुंचे। सचिवालय खुले होने के बावजूद लेखपाल की अनुपस्थिति के कारण ग्रामीणों के राजस्व संबंधी कार्य नहीं हो सके। पिठलोकर के ग्रामीण शाकिब, मंसूर, अफरोज, अजहर, राजा ठाकुर, तस्लीम, सनव्वर, इस्माइल, अबरार और जुबैर ने बताया कि शासनादेश के बावजूद लेखपाल नियमित रूप से सचिवालय में नहीं बैठते। इससे आय, जाति, निवास प्रमाणपत्र समेत अन्य राजस्व कार्यों के लिए लोगों को तहसील के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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ग्राम प्रधान पिठलोकर शम्मो बेगम का कहना है कि ग्राम सचिवालय का उद्देश्य ग्रामीणों को गांव में ही सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। लेखपाल की नियमित अनुपस्थिति से इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
अटेरना के ग्रामीण अमित मास्टर, चरणपाल, यशपाल, अशोक सोम, रिछपाल ठाकुर, जगपाल सिंह, चरणपाल और गौरव ने भी लेखपाल की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने बताया कि कई ग्राम पंचायत सचिवालयों पर लेखपालों के बैठने का रोस्टर चस्पा किया गया है, लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा।
ग्राम प्रधान अटेरना चंचल सोम ने बताया कि शासन के निर्देशों के अनुसार सचिवालय में सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति होनी चाहिए। यदि लेखपाल निर्धारित समय पर सचिवालय में बैठेंगे तो ग्रामीणों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए तहसील के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।


ग्राम सचिवालयों में नहीं पहुंचे लेखपाल
दौराला। वलीदपुर ग्राम सचिवालय पर ताला लटका मिला। यहां न पंचायत सहायक आकाश मौजूद थे और न ही लेखपाल राकेश पहुंचे। पंचायत सहायक ने बताया कि सचिवालय में अभी कंप्यूटर सेट नहीं रखा गया है, इसलिए कार्यालय बंद था। लेखपाल राकेश का कहना है कि अन्य सरकारी कार्यों के कारण वह गांव में नहीं पहुंच सके। जलालपुर ग्राम सचिवालय में पंचायत सहायक पंकज मौजूद मिले, लेकिन लेखपाल उमेश गौतम नहीं पहुंचे। पंचायत सहायक ने बताया कि उन्होंने लेखपाल से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन नहीं उठा। लेखपाल उमेश गौतम ने बताया कि वह गांव में चक संबंधी कार्य के सिलसिले में गए थे। दोपहर तक वहीं व्यस्त रहे, इसलिए सचिवालय नहीं पहुंच सके।

एक लेखपाल पर पांच गांवों का जिम्मा
सरूरपुर। प्रदेश सरकार की मंशा ग्रामीणों को आय, जाति, निवास, विरासत और अन्य राजस्व संबंधी सेवाएं ग्राम सचिवालयों पर उपलब्ध कराने की है। लेकिन सरूरपुर क्षेत्र में एक लेखपाल पर पांच गांवों की जिम्मेदारी होने से व्यवस्था दम तोड़ती नजर आ रही है। रोस्टर के अनुसार प्रत्येक गांव में सप्ताह में केवल एक दिन ही लेखपाल बैठ रहे हैं। गांव जसड़ सुल्तान नगर ग्राम सचिवालय में बृहस्पतिवार को कई ग्रामीण अपने राजस्व संबंधी कार्यों के लिए पहुंचे, लेकिन लेखपाल का बृहस्पतिवार को रोस्टर अन्य गांव में होने के कारण उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि सप्ताह में केवल एक दिन मिलने वाली सुविधा से प्रमाणपत्र, विरासत और अन्य लंबित मामलों का समय पर निस्तारण नहीं हो पा रहा है। लेखपाल ललित ने बताया कि उनके पास एक नगर पंचायत क्षेत्र व पांच गांवों का कार्यभार है। रोस्टर के अनुसार प्रत्येक गांव में सप्ताह में एक दिन बैठकर राजस्व संबंधी कार्यों का निस्तारण किया जाता है। बृहस्पतिवार को उनका रोस्टर पांचली बुजुर्ग में था। शुक्रवार को वह जसड़ सुल्तान नगर ग्राम सचिवालय में बैठकर ग्रामीणों के कार्य करेंगे।

ग्राम सचिवालय में लेखपाल रहे नदारद
खरखौदा। खरखौदा क्षेत्र में ग्राम पंचायत पांची सचिवालय में पड़ताल की गई तो वहां लेखपाल नहीं मिले। पंचायत सहायक रिया त्यागी ने बताया कि लेखपाल सोमेश्वर शर्मा का गांव में सोमवार का दिन निश्चित है। जांच में पता चला कि किसी बोर्ड पर भी लेखपाल के तैनाती का दिन या उनका कोई नंबर अंकित नहीं मिला। लेखपाल सोमेश्वर शर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि कृषि दुर्घटना बीमा को लेकर वह तहसील में उपस्थित हैं।
गांव नागपुर में भी सचिवालय में पड़ताल की गई तो वहां पंचायत सचिवालय तो खुला था लेकिन उसमें कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। लेखपाल उपासना का सचिवालय में तैनाती का कोई दिन निश्चित नहीं है। ग्रामीणों को जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र के सत्यापन व राजस्व विभाग से संबंधित कागज पूरे करने के लिए तहसील का चक्कर काटना पड़ता है। लेखपाल उपासना से बात करने का प्रयास किया गया तो मोबाइल बंद मिला।
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नालपुर स्थित सचिवालय पर तैनात ग्राम सचिव रोकिश ने बताया कि एनजीटी के आदेश पर गांव नालपुर में एक तालाब की पैमाइश कराई जानी है, जिसे लेकर लेखपाल से पिछले पांच दिन से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन उनका फोन लगातार बंद आ रहा है।

दौराला - बंद पड़ा ग्राम सचिवालय वलीदपुर। स्रोत : संवाद

दौराला - बंद पड़ा ग्राम सचिवालय वलीदपुर। स्रोत : संवाद

दौराला - बंद पड़ा ग्राम सचिवालय वलीदपुर। स्रोत : संवाद

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