हस्तिनापुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल करने वाले गोपाल काली ने शुक्रवार को अपना पर्चा वापस ले लिया। सिवालखास से सुबोध त्यागी और किठौर से कासिम ने भी अपना नाम वापिस ले लिया। अब जिले की सात सीटों पर 72 उम्मीदवार चुनावी मैदान में रह गए हैं। दोपहर तीन बजे तक नाम वापसी हुई, तो उसके बाद प्रतीक चिह्नों का वितरण किया गया। शाम पांच बजे तक चिह्न बांटे गए। मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों के तो चुनाव चिह्न तय थे। बाकी अधिकतर उम्मीदवारों को उनकी मांग के अनुरूप ही चिह्न मिल गए।
प्रत्याशी को नहीं मिला पार्टी का सिंबल, गहमागहमी
मेरठ शहर सीट से सर्व सम्भाव पार्टी के उम्मीदवार मुर्तजा को पार्टी का चुनाव चिह्न न मिलने पर जमकर गहमागहमी हुई। मुर्तजा का कहना था कि उन्हें उनका चुनाव चिह्न टायर न देकर निर्दलीय का चिह्न ट्रक दिया जा रहा है। जबकि उन्होंने अपने पर्चे में पार्टी द्वारा दिया गया सिंबल, ए व बी फार्म, पार्टी का पत्र तथा शपथ पत्र सब लगाया है। उधर आरओ अवधेश सिंह का कहना था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में स्वतंत्र उम्मीदवार लिखा था, तो निर्दलीय ही प्रतीक दिया जाएगा। मुर्तजा के मुताबिक उनकी पार्टी के अध्यक्ष राजपाल यादव आला अधिकारियों से बात कर रहे हैं। वह इस नाइंसाफी के खिलाफ कोर्ट जाएंगे।
दिनेश खटीक ने लिया गोपाल काली से आशीर्वाद
मेरठ। हस्तिनापुर सीट पर गोपाल काली के मैदान में उतरने से भाजपाइयों में बेचैनी थी। दिनेश खटीक को टिकट मिलने के बाद गोपाल ने बगावती तेवर अख्तियार कर लिए थे। दरअसल, गोपाल इस टिकट के प्रबल दावेदार थे। नाराज गोपाल ने निर्दलीय पर्चा भर दिया। ऐसे में भाजपाई उन्हें मनाने में जुटे और शुक्रवार को आखिरकार उनका पर्चा वापस हो गया। कलक्ट्रेट में इस दौरान दिनेश खटीक भी मौजूद थे। उन्होंने गोपाल काली के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।