प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में हुआ कार्यक्रम
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। मनुष्य का सच्चा वारिस पुण्य कर्म हैं। यह जन्म जन्मांतर उसके साथ चलते हैं। यह बात माउंट आबू से आईं राजयोगिनी उर्मिला दीदी ने कही। वे प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान में दिल्ली रोड स्थित आध्यात्मिक प्रभु मिलन भवन में आयोजित पांच दिवसीय तनाव मुक्ति शांति अनुभूति शिविर में बोल रहीं थी।
राजयोगिनी उर्मिला दीदी ने कहा कि कुमार्ग पर चलने वाले धृतराष्ट्र को सौ पुत्र होते हुए भी आज उन्हें कोई पूछने वाला नहीं है। जबकि बाल ब्रह्मचारी भीष्म निसंतान होते हुए भी अमर हैं। आज भी अपनी संतान का नाम उनके नाम पर रखने में लोग गर्व करते हैं। जबकि कौरवों का नाम कोई नहीं रखता। इसी क्रम में सत्यनारायण कथा के आध्यात्मिक रहस्य उजागर किए गए। उन्होंने कहा कि सत्यनारायण की कथा में कथा के नायक का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि वे सत्यनारायण का जीवन परिचय और उनके कृतित्व व्यक्तित्व का परिचय कथा के अंतिम दिन उजागर करेंगी।
इस अवसर पर सैकड़ों लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ उर्मिला दीदी, सुनीता दीदी, अनुभूति चौहान डायरेक्टर अरुणोदय संस्था, यूनिका चौधरी, ममता श्रीवास्तव, दिशा तलवार, यूनियन बैंक मैनेजर देवेंद्र ने किया। इस अवसर पर विमला, पूनम, शिवानी, सोनम, विनोद, आनंद, नरेंद्र, सुमित रहे।