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आयुष्मान भारत : सरकारी से रेफर हों, तभी मरीज जाएं निजी अस्पताल

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मेरठ। आयुष्मान भारत की प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत कम मरीजों का इलाज करने पर डीएम अनिल ढींगरा नाराज हैं। बुधवार को उन्होंने मेडिकल कॉलेज में समीक्षा बैठक की, जिसमें मरीजों की संख्या बढ़ाने की हिदायत दी। चिकित्सकों ने सुझाव दिए कि आयुष्मान के मरीजों का इलाज पहले सरकारी चिकित्सालयों में कराया जाए। जब सरकारी में इलाज न हो और मरीज को रेफर किया जाए, तभी प्राइवेट अस्पताल में भेजा जाए। डीएम सुझाव को शासन को भेजेंगे।
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मरीजों की संख्या बढ़ाने के लिए यह भी सुझाव दिया गया कि आशाओं को इसकी जिम्मेदारी दी जाए कि वे आयुष्मान के मरीजों को सरकारी अस्पताल ही लेकर आएं। इसके लिए उन्हें प्रति मरीज अलग से भुगतान भी किया जाए। भर्ती होने पर मरीज का भले ही ऑपरेशन या सर्जरी न हो, फिर भी जो इलाज हुआ है उसका भुगतान कराया जाए। आयुष्मान मित्र को पांच हजार रुपये मिलते हैं, उसकी सैलरी बढ़ाई जाए, ताकि वह बेहतर कार्य कर सके। चिकित्सकों का कहना था कि आयुष्मान के मरीज निजी अस्पताल में इलाज कराना पसंद करते हैं, इसलिए सरकारी अस्पतालों में कम आ रहे हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि सुझाव बनाकर भेजें, शासन तक इनको पहुंचाया जाएगा। मेडिकल में हर रोज 25 मरीज भर्ती किए जाने चाहिए, लेकिन हो रहे हैं सिर्फ दो। चिकित्सा शिक्षा मंत्री और प्रमुख सचिव भी पहले इस पर नाराजगी जता चुके हैं। बैठक में प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक डॉ. धीरज बालियान, डॉ. सुभाष, एसीएमओ डॉ. पूजा शर्मा, डॉ. टीवीएस आर्य और उप अधीक्षक डॉ. दिनेश राणा आदि रहे। गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज मेरठ में आयुष्मान भारत के तहत 863 मरीजों का इलाज हुआ है। इनमें मेडिसिन और टीबी विभाग में 279, सर्जरी विभाग में 139, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में 126, बाल रोग में 90, अस्थि रोग में 109, नेत्र रोग में 69, ईएनटी में 31 और मानसिक रोग में 20 मरीजों को भर्ती किया गया है। इस संबंध में चार विभागों (मेडिसिन, सर्जरी, गायनिक और बाल रोग) के प्रभारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
25 से 31 जनवरी तक चलेगा अभियान
आयुष्मान भारत योजना के तहत सत्यापन न होने के कारण लाभ से वंचित लाभार्थियों सत्यापन किया जाएगा। इसके लिए 25 से 31 जनवरी तक सत्यापन अभियान चलाया जाएगा, ताकि वे लाभ से वंचित न रह सकें। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें लाभ मिलने लगेगा।
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