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Meerut News: शांतिनाथ विधान में तप की महिमा का वर्णन, 150 परिवारों ने की आराधना

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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर स्थित भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान के 32वें दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वेदी पर विराजमान त्रय तीर्थंकरों के जलाभिषेक से हुआ। श्रद्धालुओं ने त्रिमूर्ति जिनालय पहुंचकर विधान की मांगलिक क्रियाएं संपन्न कीं।
विधान के दौरान दिग्बंधन, पात्र शुद्धि, जल शुद्धि और सकलीकरण जैसी धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। शांतिधारा अचल जैन, सुनीता जैन, साक्षी जैन, निकुंज जैन, दिव्यम जैन और रिद्धि जैन ने की। इसमें राजीव जैन का सहयोग रहा।
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मुनि भावभूषण महाराज ने कहा कि मनुष्य के भीतर क्रोध, मान, माया, लोभ, ईर्ष्या और द्वेष जैसे विकार तथा अष्ट कर्म रूपी बंधन विद्यमान रहते हैं। इन कर्मों का क्षय केवल तप रूपी शोधन से ही संभव है। उन्होंने कहा कि तप की महिमा अपरंपार है और देवता भी तप करने वाले साधकों को नमन कर स्वयं को धन्य मानते हैं। तीर्थंकरों ने भी तप के माध्यम से ही कर्मों का नाश कर आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को तप और संयम को जीवन में अपनाना चाहिए।
संगीतमय आरती, भजन एवं भक्ति का आयोजन किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत भजन प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को जिनेंद्र कुमार जैन, अनुज जैन, मनीषा जैन, शचि जैन और विदित जैन द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। विधान में क्षेत्र के लगभग 150 परिवारों ने भाग लेकर जिनेंद्र भगवान की आराधना की।
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इस मौके पर अध्यक्ष जीवेंद्र जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, मंत्री राजीव जैन सहित अनेक पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद

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