जिसमें सृष्टि ने 27वां स्थान प्राप्त किया और उसको सरकार की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान एकेडमी रायबरेली में जगह मिल गई। जहां दो साल की शिक्षा के बाद वह कॉमर्शियल पायलट बन गई हैं। सृष्टि के पायलट बनते ही कई कंपिनयों से नौकरी के प्रस्ताव मिले। लेकिन वह अब विशेषज्ञ की ट्रेनिंग के लिए दो महीने को स्पेन जाएंगी।
बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं
सृष्टि वर्मा कहती है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहती हैं। अब बेटियां हवाई जहाज भी उड़ा सकती हैं और हर किसी को कुछ अलग करना चाहिए। वह कहती है कि केवल एक लक्ष्य निर्धारित किया जाए और उस लक्ष्य को छूने के लिए मेहनत की जाए। उसके बाद कभी ऐसा नहीं हो सकता है कि वह लक्ष्य पूरा नहीं हो।