घूसखोरी के करंट से रोशन कॉलोनियों का मामला गरमा गया है। पीवीवीएनएल एमडी ने पूरे मामले की जांच अधीक्षण अभियंता देहात को सौंपते हुए रिपोर्ट तलब कर ली है। एमडी के रुख से मामले में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा है।
शहर को नियोजित रूप से विकसित करने का जिम्मा संभालने वाले एमडीए और बिजली विभाग की अनियमितताओं का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। एमडीए के पास कर्मियों की पूरी फौज होने के बाद जहां लगातार कच्ची कालोनियां काटी जा रही हैं, वहीं बिजली विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारी इन कॉलोनियों को बिना विद्युतीकरण के ही कनेक्शन देकर अपनी जेब भर रहे हैं। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में ‘घूसखोरी के करंट से रोशन प्राइवेट कॉलोनियां’ शीर्षक से खबर को प्रमुखता से छापा था। इन कॉलोनियों में पावर कारपोरेशन के जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना विद्युतीकरण के ही लाइन देकर कनेक्शन जारी कर दिए। खबर छपने के बाद मामला इस कदर गरमाया कि पीवीवीएनएल एमडी अभिषेक प्रकाश ने अधीक्षण अभियंता देहात वीएन सिंह को पूरे मामले की जांच करने के आदेश दे दिए।
घपलों पर नपें तो न हों नए घोटाले
घपले घोटालों का बिजली विभाग से पुराना नाता रहा है। इससे पहले भी तमाम घपले सामने आए। लेकिन उच्च स्तर से कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो घूसखोर अफसर बेखौफ होते गए। इससे पहले 33 केवी मलियाना एसबी फैक्ट्री बिजलीघर के अंतर्गत मलियाना क्षेत्र में निर्माणाधीन दो कॉमर्शियल कॉम्पलेक्सों में बिना इस्टीमेट जमा कराए ही दुकानदारों के स्वतंत्र कनेक्शन जारी कर दिए गए। मामले की खबर छपने के बाद एमडी ने जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट मांगी। लेकिन डेढ़ माह बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। मुख्य अभियंता मेरठ जोन पंकज कुमार ने बताया कि अभी तक उनके पास मामले की जांच रिपोर्ट नहीं आई है। बिना रिपोर्ट के वह कैसे कार्रवाई कर सकते हैं।
पूरे शहर में फैला है जाल
घूसखोर अफसरों और कॉलोनाइजरों की मिलीभगत से विभाग के राजस्व को खुलकर क्षति पहुंचाई जा रही है। पूरे शहर में अवैध रूप से काटी जा रही कच्ची कालोनियों को न तो एमडीए रोक रहा है और न ही बिजली विभाग कनेक्शन देेने से मना कर रहा है। पैसा लेकर इन कॉलोनियों को बिना ऊर्जीकृत किए ही जुगाड़बाजी से बिजली आपूर्ति कर दी जाती है। अगर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो भ्रष्टाचार का बड़ा मामला मिलेगा।
मठाधीश लेते हैं ठेका
पीवीवीएनएल में आधा दर्जन से ज्यादा ऐसे मठाधीश जेई हैं जो एक ही जिले में दस साल से जमे हैं। कई जेई तो दस साल से एक या दो बिजलीघरों पर ही तबादले पर घूमते रहते हैं। ऐसे मठाधीश जेई यहां के घाघ लाइनमैनों की मदद से अवैध कनेक्शनों का ठेका लेते हैं। नियमानुसार नहीं दिए जा सकने वाले कनेक्शन को घूस लेकर तुरंत दे दिया जाता है।