रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी ने कहा कि केन्द्र की मोदी सरकार चार साल से किसानों के साथ मजाक कर रही है। बिजली बिल बढ़ा दिए हैं। बिना लागत समीक्षा के धान पर 200 रुपये बढ़ाकर मजाक किया है। किसान की फसल जब बाजार में आने वाली होती है उस दौरान सरकार उसी फसल का आयात कर किसान मजदूर की कमर तोड़ने का काम कर रही है। केन्द्र और राज्य सरकार के पास जनता को दिखाने और गिनाने के लिए कोई विकास या जनहित कार्य नहीं है। भाजपा केवल समाज को धर्म के नाम पर बांटकर राजनीतिक रोटियां सेक रही है।
दिल्ली रोड स्थित चेंबर ऑफ कामर्स में शनिवार को रालोद के सदस्यता समारोह में वह बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि आगामी लोकसभा में गठबंधन जनता को न्याय दिलाने का काम करेगा। एक सिरे से भाजपा साफ हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देकर लोगों को छलने वाली भाजपा ही अब बहू-बेटी की सबसे बड़ी भक्षक बन गई है। उन्होंने कहा कि बिजली की बढ़ी दरें, ध्वस्त कानून व्यवस्था और अन्य जनसमस्याओं को लेकर राष्ट्रीय लोक दल आगामी 13 जुलाई से 12 अगस्त तक हल्ला बोल, पोल खोल आंदोलन करेगी। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ता बिजलीघरों को घेरने के साथ गांव-गांव जाकर जनजागरण अभियान चलाएंगे। सभा में राष्ट्रीय महासचिव त्रिलोक त्यागी, संयोजक पूर्व मंत्री डा. मैराजूद्दीन, पूर्व विधायक राजेन्द्र शर्मा, जिलाध्यक्ष राहुल देव, किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी राम मेहर सिंह गुर्जर, सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कर्नल ब्रह्मपाल तोमर, प्रदेश संगठन मंत्री डा. राजकुमार सांगवान ने भी अपने विचार रखे।
प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा ने बताया कि जयंत चौधरी आंदोलन के प्रथम दिन जनपद आगरा के किरावली से अभियान की शुरुआत करेंगे। इस मौके पर मेरठ बार एसो. के अध्यक्ष राजेन्द्र जानी, राजेन्द्र चिकारा, यशवीर सिंह, चौधरी रतन सिंह, विकास सिंह भैंसा, रणवीर दहिया, अनीस कुरैशी, सोनू गुर्जर, सर्वेश पुंडीर, संजय जाटव, नरेन्द्र खजूरी, राजीव बालियान, संदीप चौधरी, शादाब चौहान, पप्पू गुर्जर, कमलजीत गुर्जर आदि उपस्थित रहे।
50 से अधिक ने ली सदस्यता
रालोद के सदस्यता समारोह में जयंत चौधरी ने विभिन्न राजनीतिक दलों से आए 50 से भी अधिक लोगों को रालोद की सदस्यता ग्रहण कराई। जयंत ने पार्टी में आने वाले सदस्यों का अभिनन्दन करते हुए कहा कि कैराना उपचुनाव में मिली जीत के बाद हम सभी की जिम्मेदारी बढ़ गई है। कैराना जनादेश के बाद सत्ताधारी दल में बौखलाहट है।