हल्की बारिश हो रही थी। राजमिस्त्री बबलू पत्नी सुमन से बोला कि तुम चाय बनाओ, मैं नहाकर आता हूं। बबलू बाल्टी लेकर नल पर पहुंचा। वह नहा रहा था। तभी गेट से आवाज आई कि बबलू घर पर है क्या। बबलू बोला कौन है, तभी एक बदमाश बोला कि घर पर काम कराना है। उसने नहाते हुए ही दरवाजे की कुंडी खोली, तभी दो बदमाशों ने गोलियां की बौछार कर दी। सुमन जीने की तरफ दौड़ी। बबलू का भाई महेंद्र छत से कूद आया। तब तक बदमाश बबलू को मार चुके थे। बदमाशों तक महेंद्र पहुंच तो गया था। लेकिन बदमाश बैग छोड़कर भागने में कामयाब हो गए।
पकड़े जा सकते थे बदमाश
बबलू का घर गांव के बीचोबीच है। गली भी छोटी है। आने-जाने का रास्ता भी एक है। सुबह का समय था। खूब चहल पहल थी। तीन बदमाश पल्सर बाइक पर आए और वारदात कर आसानी से फरार हो गए। महेंद्र की तरह थोड़ी से हिम्मत गांव वाले दिखा देते तो शायद हत्यारे मौके पर ही पकड़े जाते।
जंगलराज बन गया जिला
जिले में एक के बाद एक हत्या की वारदात हो रही हैं और पुलिस कातिलों को गिरफ्तार करने में नाकाम साबित हो रही है। जिले में जंगलराज जैसा माहौल बन रहा है। लोग डरने लगे हैं कि बदमाश कब उनके साथ वारदात न कर दें। हत्या के गवाहों और पैरवी करने वालों में इतनी दहशत है कि कोई घर से निकल नहीं रहा। एसएसपी से लोग रोजाना सुरक्षा मांगने आ रहे हैं।