फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता जी का मंगल जैन में मंगल प्रवेश

विज्ञापन
विज्ञापन
चार घंटे पैदल यात्रा कर जम्बूद्वीप तीर्थ पहुंची यात्रा
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। जम्बूद्वीप तीर्थ निर्माण की पावन प्रेरिका गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी का मंगल आगमन रविवार को जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर तीर्थ पर भारी गर्मजोशी के साथ हुआ। हजारों भक्तों की तादाद ने पूज्य माताजी के प्रति उमड़ी भक्ति को प्रदर्शित किया। सुबह में पूज्य माताजी का मंगल विहार जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर के लिए हुआ। माताजी जी के संघ ने चार घंटे पैदल यात्रा कर जम्बूद्वीप तीर्थ पर प्रवेश किया।
जुलूस में देखे गए विशेष आकर्षण
बैंड बाजे, डीजे, ढोल ढमाके, जगह-जगह नृत्य करते श्रद्धालु, अनेक झाकियां, बग्गियों में बैठे समाज के अनेक गणमान्य भक्त, जैन ध्वज लेकर शामिल स्काउट के 250 बच्चे, स्कूलों की सैकड़ों बालिकाएं, पुष्प वृष्टि करता ऐरावत हाथी और आकाश से पुष्प वृष्टि करता ड्रोन हेलिकॉप्टर, मंगल कलश लेकर चलती महिलाएं और इन सब के मध्य हजारों भक्तों की भीड़ ने पूज्य माताजी के संघ को देखकर इस पूरे लावलश्कर ने हस्तिनापुर की पावन धरती को अध्यात्मिक रंग से भाव विभोर कर दिया।
विज्ञापन

चेयरमैन अरुण कुमार ने अगवानी की
जुलूस के प्रारंभ में चेयरमैन अरुण कुमार ने माताजी की अगवानी की। वहीं, हस्तिनापुर टाउन में रहने वाले सैकड़ों नर-नारी, बालक-बालिकाओं ने कहीं पुष्पवृष्टि, कहीं आरती तो कहीं श्रीफल समर्पण करके अपने भाग्य की सराहना की। हस्तिनापुर की शान मानकर पूज्य माताजी की जैन जैनेत्तर समाज ने भरपूर अगवानी की।
सरकार द्वारा राजकीय अतिथि का दर्जा प्राप्त पूज्य माताजी की अगवानी पर समस्त शासन-प्रशासन और पुलिस बल ने भी भक्ति और सेवा समर्पण के साथ सुरक्षा और पूरे जुलूस की व्यवस्था को संभालकर पूज्य माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इतने भारी उत्साह और उत्सव के पूज्य माताजी का हस्तिनापुर शहर होते हुए नहर के रास्ते से जैन सर्किट में प्रवेश हुआ तो जैन श्रद्धालुओं ने पूज्य माताजी की आदर सम्मान के साथ अगवानी की। सर्वप्रथम प्राचीन मंदिर के समस्त पदाधिकारियों ने पूज्य माताजी को मंदिर के दर्शन कराए और पाद प्रक्षाल आदि के साथ खुशी अभिव्यक्त की। इस आगमन के मध्य संतों का समागम भी भारी प्रेम और आत्मीयता के साथ देखने को मिला। मुनिश्री निशंकसागर जी स्वयं माताजी के आगमन पर जुलूस के मध्य पहुंचे। वहीं, इसी प्रकार कैलाश पर्वत के समक्ष भी आर्यिका श्री विद्याश्री माताजी और विधाश्री माताजी ने भी पधारकर पूज्य माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
जम्बूद्वीप पहुंचकर आंसुओं को नहीं थाम सकीं मां
चार घंटे तक सतत जुलूस में चलकर पूज्य माताजी का संघ जम्बूद्वीप तीर्थ के निकट आया। श्री ज्ञानमती माताजी अपने आंसू को थाम नहीं सकीं। दिल में प्रेम हो तो धर्म के प्रति होना चाहिए, तीर्थों के प्रति होना चाहिए। तीर्थों एवं भगवंतों के प्रति इस धरती पर यदि आदर्श प्रेम देखने को मिल सकता है। वह केवल ज्ञानमती माताजी के मन में समाया हुआ देखा जा सकता है।
विज्ञापन

विभिन्न स्थानों से पधारे भक्तजन
यहां दिल्ली, मेरठ, सरधना, खतौली, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद, मुंबई, औरंगाबाद, नासिक, शिरडी, पुणे, सटाणा, लखनऊ, टिकैतनगर, बाराबंकी, महमूदाबाद, जयपुर, केकड़ी, अजमेर आदि से हजारों भक्तों ने शामिल ह़ए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें