शासन से अनुमति मिलते ही नहरों की सफाई शुरू होने की संभावना है। 11 अक्तूबर की रात से 30 अक्तूबर तक के लिए हरिद्वार से गंगनहर का पानी रोके जाने की संभावना है। सिंचाई विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव पर अभी शासन ने मोहर नहीं लगाई है। वहीं नहर बंद होते ही मछली माफियां पानी में जहर डालकर मछलियों के शिकार का खेल शुरू करते हैं। इसके बाद भी पुलिस प्रशासन कुछ नहीं कर पाता।
अक्तूबर में हर साल सफाई के लिए गंगनहर को हरिद्वार से बंद किया जाता है। इस बीच मेरठ के सिवालखास से मुरादनगर गंगनहर तक मछली माफिया जगह-जगह मछलियों का शिकार करने के लिए जाल बिछाते हैं। कीटनाशक से मछलियां मरने के बाद पानी के ऊपर आ जाती हैं।
इन्हें करनाल, मेरठ, मुरादाबाद, दिल्ली, कानपुर आदि में इनकी तस्करी की जाती है। सूत्रों के मुताबिक यह धंधा पुलिस और सफेदपोशों की सरपरस्ती में चलता है। एसडीएम अतुल कुमार का कहना है कि निवाड़ी और मुरादनगर पुलिस को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वह मछली माफियाओं पर पैनी नजर रखें।
गंगानहर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके जैन का कहना है कि नहर बंद करने के लिए अभी शासन से आदेश नहीं आया है। जूनियर इंजीनियर हड़ताल पर हैं। नहरों की सफाई में जूनियर इंजीनियरों की अहम भूमिका होती है। ऐसी स्थिति में सरकार नहरों की सफाई की तिथि को आगे भी बढ़ा सकती है।