गुलाबी से तीखी हो रही ठंड के बीच श्रद्धालुओं ने कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा मैया की गोद में आस्था की डुबकी लगाई। सूर्यदेव के दर्शन होते ही घाट हर-हर गंगे के उद्घोष से गूंजने लगा। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन और दान कर पुण्य कमाया। यहां मंगलवार आधी रात से शुरू हुआ पुण्य स्नान का सिलसिला बुधवार देर शाम तक चलता रहा।
मखदूमपुर गंगा घाट पर पांच दिन पहले से ही श्रद्धालुओं ने डेरा जमाना शुरू कर दिया था। मंगलवार आधी के बाद लोगों ने पतित पावनी गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया। इसके बाद गंगा घाट पर प्रसाद के रूप में खिचड़ी खाने के बाद ही लौटना शुरू कर दिया। इस दौरान कई जगह अव्यवस्था भी देखने को मिली। श्रद्धालुओं को मवाना और परीक्षितगढ़ समेत कई जगहों पर जाम से जूझना पड़ा।
कूड़ा-कचरा छोड़ गए श्रद्धालु
गंगा घाट समेत चारों तरफ कूड़ा और गंदगी का अंबार नजर आ रहा था। जिला पंचायत द्वारा रखवाए गए कूडे़दान शोपीस बनकर रह गए। श्रद्धालु खुद तो पवित्र होकर चले गए, लेकिन पतित पावनी को गंदा कर गए। श्रद्धालुओं के स्नान, दीपदान और पिंडदान के बाद जगह-जगह पॉलिथिन, फूल-मालाएं, दोने और दीपक आदि के ढेर लगे थे।
अराजक तत्व बने परेशानी
मेले में फोर्स की कमी के चलते अराजक तत्व श्रद्धालुओं और दुकानदारों के लिए परेशानी का सबब साबित हुए। कई जगह महिलाओं और युवतियों से छेड़छाड़ की भी घटनाएं हुईं। पीएसी जवानों ने शरारती तत्वों को लाठियां फटकार कर खदेड़ा।
मेले में नहीं पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी
मेले के उद्घाटन के बाद कोई भी वरिष्ठ अधिकारी श्रद्धालुओं की सुध लेने नहीं पहुंचा। 21 नवंबर को गंगा स्नान मेले का उद्घाटन डीएम पंकज यादव, सीडीओ नवनीत चहल और जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदरपाल सिंह ने किया था। इसके बाद किसी भी अधिकारी ने मेले की तरफ रुख नहीं किया।