2013 में मिलने वाला गंगाजल अभी तक शहर की जनता से दूर है। तीन दिन पहले जल निगम ने गंगाजल की टेस्टिंग रिपोर्ट सार्वजनिक कर दी थी। जिसमें यह साफ हो चुका है कि भोले की झाल से आने वाला गंगाजल पूरी तरह पीने योग्य है। रिपोर्ट आने के बाद भी शहर की जनता को गंगाजल नहीं दिया जा रहा है। उधर नगर निगम जलकल विभाग ने जल निगम की तरफ से यह रिपोर्ट भी न मिलने की बात कही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जल निगम गंगाजल परियोजना को लेकर कितना गंभीर है।
जेएनएनयूआरएम के तहत 2010 में शहर में करीब 350 करोड़ रुपये से गंगाजल योजना शुरू हुई थी। करोड़ों रुपये खर्च करके शहर भर में गंगाजल पाइप लाइन बिछाई गई। काफी जद्दोजहद के बाद पिछले महीने जल निगम अधिकारियों ने होली पर ही जनता को गंगाजल देने का दावा हवा हवाई साबित हुआ है।
नहीं मिली अभी रिपोर्ट
नगर निगम के महाप्रबंधक जल संजीव रामचंद्र का कहना है कि सुना जरूर है कि जल निगम ने पानी की टेस्टिंग करा ली है। रिपोर्ट भी सही आयी है, लेकिन अभी तक जल निगम से हमारे पास ऐसी कोई रिपोर्ट या पत्र नहीं आया है। वैसे भी जल निगम जब चाहे पाइप लाइन में पानी छोड़ सकता है। हमारा काम तो इतना है कि जिस दिन भी जल निगम पानी छोड़ेगा, उसी दिन से हम पानी की स्थिति जांच कर, उसी हिसाब से सप्लाई शुरू कर देंगे।
भोला झाल से रोजाना पांच क्यूसेक पानी
भोला झाल से रोजाना शहर में पांच क्यूसेक पानी आ रहा है। जल निगम की मानें तो इसका इस्तेमाल अभी पाइप लाइन, जलाशय और सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की टेस्टिंग में किया जा रहा है। दूसरे शब्दों में पानी को नालों में बहाया जा रहा है। नगर विकास और सिंचाई विभाग के बीच धन की लड़ाई खत्म होने के बाद शहर को 43 क्यूसेक पानी मिलना तय है।
जल्द कराएंगे कार्यवाही
परियोजना प्रबंधक जल मुन्ना सिंह के अनुसार पाइप लाइन की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। रिपोर्ट भी आ गयी है। सोमवार को जल कल विभाग के अधिकारियों से वार्ता करके पाइप लाइन में पानी की सप्लाई छोड़ने की कार्यवाही शुरू कराएंगे। फिलहाल पांच क्यूसेक पानी हमारे पास है। जिसका इस्तेमाल हम लगातार पाइप लाइन की टेस्टिंग में कर रहे हैं। कुछ पानी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट और सीवर लाइन की टेस्टिंग में भी किया जा रहा है।