आधी अधूरी तैयारी के बीच मंगलवार से गंगाजल की सप्लाई शुरू हो गई। शहर के सर्किट हाउस जलाशय से जुड़े इलाकों में आपूर्ति की गई। पानी में रेत बहुत है, इससे लोगों के आरओ भी चोक हो गए। पानी छोड़ने में जल्दबाजी और लापरवाही की गई है। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जेएनएनयूआरएम के तहत गंगाजल परियोजना की शुरू की गई है। यह कई करोड़ का प्रोजेक्ट है। करीब छह साल से योजना पर काम चल रहा है। इतनी बड़ी योजना को शुरू करने में बड़ी लापरवाही सामने आई है। मंगलवार को सुबह पांच बजे सर्किट हाउस के जलाशय में गंगाजल की सप्लाई शुरू की गई। उस समय कोई भी बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं था। केवल नगर निगम के जेई को बुलाया गया। जल निगम और प्रशासन की ओर से कोई नहीं आया।
पाइप लाइन डालने वाली प्रतिभा कंपनी के अधिकारियों ने सप्लाई शुरू कर दी। हालांकि अभी सर्किट हाउस जलाशय से जनता के घरों तक पहुंचे पानी में 90 प्रतिशत ट्यूबवेल का पानी है और 10 प्रतिशत गंगाजल है। तब इतनी गंदगी पानी में आ रही है, अगर पूरा गंगाजल सप्लाई किया गया तो क्या हाल होगा।
मात्र आधा क्यूसेक छोड़ा
सर्किट हाउस जलाशय की क्षमता पांच हजार किलो लीटर है। इस पानी में मंगलवार को आधा क्यूसेक गंगाजल मिला दिया गया। जिसका असर क्षेत्र में पानी की सप्लाई में अच्छे प्रेशर के रूप में देखने को मिला। लोगों की दूसरी मंजिल तक पानी पहुंच गया।
मेघदूत के पास से खोला गया पानी
सर्किट हाउस जलाशय में पानी डालने के लिए मेघदूत सिनेमा के पास से गंगाजल की पाइप लाइन को खोला गया। फिलहाल प्रतिभा कंपनी ने अपना एक कर्मचारी पाइप लाइन का पानी खोलने के लिए तैनात किया है। हालांकि बाद में इसकी व्यवस्था आटोमेटिंक सेंसर से की जाएगी।
इन कालोनियों में पहुंचा गंगाजल
साकेत, सिविल लाइन क्षेत्र, सूर्य नगर, प्रगति नगर, आफिसर कालोनी, वेस्टर्न कचहरी रोड, शिवाजी रोड, नंगला बटटू, अशोक वाटिका, प्रभातनगर, मोहनपुरी, मंगलपांडे नगर आदि।
सर्किट हाउस जलाशय पर नहीं लगा सेंसर
जेएनएनयूआरएम की गंगाजल परियोजना में बताया गया था कि सर्किट हाउस हो या अन्य जलाशय। सभी पर जल निगम सेंसर लगवाएगा, ताकि अत्याधुनिक मशीनरी के माध्यम से ही पाइप लाइन से गंगाजल लेकर जलाशय को भरा जा सके। साथ ही जलाशय भरने पर अपने आप ही पाइप लाइन से गंगाजल बंद हो जाए। अभी तक एक भी जलाशय पर जल निगम ने यह व्यवस्था नहीं की है।
नालों में बह रहा साढ़े चार क्यूसेक पानी
साढ़े चार क्यूसेक गंगाजल अभी भी नालों में बह रहा है। अभी तक जल निगम ने गंगाजल को नाले में बहाने से रोकने का कोई इंतजाम नहीं किया है।
भोले की झाल पर साफ होता है गंगाजल
प्रतिभा इंडस्ट्रीज लि. के परियोजना प्रबंधक हरिप्रसाद शर्मा की मानें तो भोले की झाल पर ट्रीटमेंट प्लांट में गंगाजल को पूरी तरह साफ किया जा रहा है। गंगाजल में नियमित रूप से क्लोरीन, ब्लीचिंग पाउडर, एलम डाला जा रहा है, ताकी जनता तक पहुंचने वाला गंगाजल पूरी तरह शुद्ध हो।
फोन नहीं उठाते जल निगम के अधिकारी
जेएनएनयूआरएम गंगाजल योजना पर लगभग पांच सौ करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं। जिसकी कार्यदायी संस्था जल निगम है। मंगलवार को जब घरों में गंदा पानी पहुंचा तो लोगों ने जल निगम के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता के फोन मिलाए। जहां अधीक्षण अभियंता के मोबाइल की घंटी बजती रही, वहीं अधिशासी अभियंता का सीयूजी नंबर बंद मिला। इससे लोग परेशान रहे।
मेयर बोले, पानी में गंदगी
महापौर हरिकांत अहलूवालिया मंगलवार शाम सर्किट हाउस जलाशय पर गंगाजल की सप्लाई देखने पहुंचे। उन्होंने प्रतिभा कंपनी के अधिकारियों से जानकारी ली, साथ ही स्वयं पानी पीकर देखा। महापौर का कहना है कि जो गंगाजल जनता को सप्लाई किया जा रहा है, उसका रंग साफ नहीं है। पानी में रेत के कण हैं। जल निगम के अधिकारियों से बात करके गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी। पाइप लाइन डालने वाली कंपनी को पानी की सप्लाई का अधिकार नहीं है। इतनी बड़ी योजना को शुरू करने से पहले बड़े अधिकारियों को मौके पर होना चाहिए था। यह बड़ी लापरवाही है। विभाग से जवाब मांगा जाएगा।
पहले पाइप लाइन को कई कई बार धोया गया है। पानी की सप्लाई जलाशय में पहुंचने से पहले भी गंगाजल की शुद्धता की जांच की गई। गंगाजल पूरी तरह साफ सप्लाई किया जा रहा है। हो सकता है कहीं पर पाइप लाइन लीकेज हो। उसके माध्यम से कुछ गंदगी पहुंची हो। दिखवाया जाएगा।
- हरिप्रसाद शर्मा, परियोजना प्रबंधक, प्रतिभा इंडस्ट्रीज लिमिटेड
प्रतिभा कंपनी के अधिकारियों ने हमारी मौजूदगी में सर्किट हाउस स्थित जलाशय में गंगाजल की सप्लाई की। उस समय हमने भी चार-पांच बाल्टी गंगाजल चेक किया। उस समय तो पानी साफ था। गंगाजल पीकर भी देखा। अभी गंगाजल केवल दस प्रतिशत ही मिला है। घरों में 90 प्रतिशत पानी ट्यूबवेल का सप्लाई किया गया है।
- अशोक कुमार, अवर अभियंता, जलकल नगर निगम