बस्तोरा नारंग गांव के समीप पहुंचा गंगा का पानी स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में न तो बारिश रुक रही है और नहीं बाढ़ का पानी। इससे यहां दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार देर रात हुई तेज बारिश और गंगा के बढ़े हुए जलस्तर ने ग्रामीणों की परेशानी को ओर बढ़ा दिया। गंगा का पानी कई गांवों के जंगलों में पहुंच गया। हालांंकि, बुधवार को राहत यह रही कि मंगलवार के मुकाबले 36 हजार क्यूसेक पानी गंगा में कम हो गया।
उत्तराखंड के देहरादून में बादल फटने से मंगलवार को अचानक गंगा का जल स्तर बढ़कर 1.70 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। देर शाम तक गंगा नदी उफान पर चल रही थी। इससे खादर क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों के हजारों लोग पूरी तरह भयभीत नजर आ रहे थे। प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से खादर क्षेत्र में अलर्ट भी जारी कर दिया गया था। परंतु इसके बाद गंगा का जलस्तर घटना शुरू हो गया। इससे लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि, पानी गंगा से बाहर निकल कर बस्तोरा नारंग गांव के समीप पहुंच गया।
बुधवार गंगा का जलस्तर बिजनौर बैराज से 1.34 लाख क्यूसेक पर चल रहा था। पिछले एक महीने में तीसरी बार गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा है। एक सितंबर को गंगा का जल स्तर बढ़ने से बस्तोरा नारंग गांव के समीप गंगा ने भीषण कटान किया था। इस कारण गंगा गांव के पास पहुंच गई थी। बुधवार को जैसे ही गंगा का जलस्तर कम हुआ तो ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। गंगा का पानी बाहर निकलने से हस्तिनापुर-चांदपुर को जोड़ने वाले टूटे संपर्क मार्ग से भी पानी निकल रहा है। अभी यह संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद है।
मुआवजे का है इंतजार
खादर क्षेत्र में बरसात के दिनों में तबाही की कहानी लिखने वाली गंगा ने सैकड़ों घरों के लोगों को बेघर कर दिया। उनके सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा रहा है। अब बाढ़ में फसल नष्ट होने के बाद उन्हें मुआवजे का इंतजार है। किसानों का कहना है कि मुआवजा मिलने के बाद ही वह अगली फसल की तैयारी करेंगे। अभी खेतों में गंगा का पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में अभी अगली फसलों की भी कोई उम्मीद नहीं है।
बस्तोरा नारंग गांव के समीप पहुंचा गंगा का पानी स्रोत संवाद