पुल की पहले से जांच होती तो नहीं होता क्षतिग्रस्त
बैराज के पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की अगर पहले से जांच होती तो शायद पुल के क्षतिग्रस्त होने की नौबत न आती। एनएच के अफसरों की मानें तो एक साल से पुल उनके पास है। इससे पहले यह पुल पीडब्ल्यूडी के पास था। जांच टीम ने पाया कि पुल की उचित तरीके से जांच नहीं की गई और न ही इसे देखा गया। मरम्मत आदि का काम भी नहीं हुआ। इसलिए पुल का यह हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ है। जांच टीम अपनी रिपोर्ट आला अफसरों को सौंपेगी।
दूसरे रास्तों से गए बड़े वाहन
बैराज के पुल का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बाद छोटे वाहनों को पुल से धीमी गति से निकाला गया। रात भर छोटे वाहन तो निकलते रहे, पर बड़े वाहन नहीं निकल पाए। काफी तादाद में वाहन बैराज के आधे रास्ते से वापस आए। बड़े वाहनों के नहीं निकलने पर लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ी। शनिवार को बड़े वाहन वाया गजरौला होकर मेरठ व दिल्ली गए। इस मार्ग पर वाहनों की भारी आवाजाही रही।
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