अपने पुत्र भीष्म की एक आवाज पर प्रकट होने वाली गंगा मां का प्राचीन काल से ही विशेष महत्व है। नेचुरल साइंसेज ट्रस्ट के चैयरमेन एवम शोभित विवि के हस्तिनापुर शोध संस्थान के समन्यवक असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती ने बताया कि हस्तिनापुर नगरी से भी गंगा का विशेष नाता है। महाभारत के अनुसार राजा शंतनु से विवाह करने के बाद गंगा हस्तिनापुर आई थी, इस आशय से हस्तिनापुर को गंगा की ससुराल का दर्जा भी प्राप्त है।
भीष्म जब तक जीवित रहे तब तक गंगा में बाढ़ को कोई भी जिक्र नही मिलता, क्योकि महाभारतकाल मे भीष्म सूर्योदय से पूर्व माँ गंगा की उपासना किया करते थे। अंगराज कर्ण हस्तिनापुर में लगभग 6 वर्ष की उम्र में आ गए थे , कर्ण भी मां गंगा की उपासना किया करते थे एवं स्नान के बाद ब्राह्मणो को सवामन सोना दान किया करते थे ।
भीष्म एवं कर्ण की मृत्यु के उपरांत, युधिष्ठिर से चौथी पीढ़ी में राजा निचक्षु के शासनकाल से हस्तिनापुर में गंगा के कारण तबाही के साक्ष्य मिलने लगे। हस्तिनापुर में गंगा की आरती का प्रावधान करना चाहिए।
हरिद्वार से काशी तक सब जगह गंगा आरती का आयोजन होता है। उपजिलाधिकारी अखिलेश यादव के निर्देश के बाद अब हस्तिनापुर में भी गंगा आरती का आयोजन संभव हो पाएगा।