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पतंग से घिर गया गगन...आ गया है फिर वसंत

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पतंग से घिर गया गगन...आ गया है फिर वसंत
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मेरठ। ‘पतंग से घिर गया गगन कि आ गया है फिर वसंत’। वसंत पंचमी को याद करती कवि अदील अहमद की इन पंक्तियों को खूब तालियां मिलीं। कवि वीरेश त्यागी ने काव्य पाठ पढ़ा- जिंदगी भले ही मैं तुझे अखरता हूं, एक मैं ही तो हूं जो तुझे समझता हूं। लोग वाह-वाह कह उठे।
बुधवार को श्रीराम भवन लालकुर्ती में संस्कार भारती और साहित्यिक इकाई स्वामी विवेकानंद इकाई का भारत माता पूजन कार्यक्रम और कवि सम्मलेन हुआ। कवि सम्मेलन की शुरुआत कवि सुदेश दिव्य ने सरस्वती वंदना से की। कवि ताराचंद मानव ने कहा कि जब हमने शासन किया था तो सस्ता राशन दिया था, जनता ने पानी की जगह दूध पिया था। इस पर खूब तालियां बजीं। कवि प्रमोद लट्ठ ने हास्य कविता पढ़ी, पत्नी हमारी शरीर से भारी, एक कुंतल का वेट हिमाचल सा स्टेट। कवि विनेश कौशिक ने सुनाया, एक दिन दादा जी ने मुझसे कहा कि बेटा पहले जैसा तो कुछ भी नहीं रहा। कवयित्री रचना वानिया ने सुनाया, हमें तो बिछुडे़ हुए एक जमाना हुआ। गजलकार मंगल सिंह मंगल ने पढ़ा, दिली सब बात कह दो तुम, अभी नाराज न हो तुम।
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इस दौरान बताया गया कि ‘सबरस केरंग’ संस्कार भारती का पहला काव्य संग्रह है, जिसमें 27 रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं। कार्यक्रम में अनिल गोयल, प्रो. अरुण सोलंकी, ममता रत्नम, अनिल गोयल, कैप्टन जेपीएस राणा, डॉ. एसडी धीमान और डॉ. सुब्रतो सेन आदि रहे।
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