जन्म कुंडली और हाथ की रेखाओं में शहर के लोगों ने नौकरी, शादी और राज योग को तलाशा। ज्योतिषाचार्यों ने लोगों की उम्मीदों को प्रबल बल दिया। शनि की साढ़े साती और सर्प काल योग से बचाव के तरीके भी बताए। दा अध्ययन स्कूल में रविवार को भी भविष्य जानने वालों का तांता लगा रहा। मेरठ के अलावा आसपास के शहरों से भी लोग कार्यक्रम में आए।
शताब्दीनगर स्थित दा अध्ययन स्कूल में आयोजित ज्योतिषाचार्यों के सम्मेलन में दूसरे दिन भी भीड़ रही। एक हॉल में ज्योतिषाचार्य सम्मेलन में लोगों ने जानकारी ली तो दूसरी ओर पार्क में बैठकर जन्मपत्रि और हाथ दिखाए। अधिकतर ज्योतिषाचार्यों के पास ऐसे परिवार अधिक आए जो धन, यश, राज योग और बच्चों की शिक्षा, नौकरी और शादी के योग पूछते दिखे। युवाओं में सबसे अधिक क्रेज सरकारी नौकरी के योग जानने के जिज्ञासा दिखाई दी। सभी टेबलों पर जिज्ञासुओं की लंबी लाइनें लगी रही। सम्मेलन में उप्र ही नहीं, बल्कि दूसरे प्रदेशों से आए ज्योतिषाचार्यों ने जनता की जन्मकुंडली और हाथों की रेखाओं के माध्यम से जिज्ञासा शांत की। ज्योतिषाचार्यो ने उपाय भी बताए। कुछ उपाय यंत्रों के पहनने और घर में रखने जैसे थे तो कुछ पीपल की पूजा और चींटी, गाय को जिमाने जैसे थे। ज्योतिषाचार्यों के सामने कतारों में लगे लोग अपने भविष्य जानने की उम्मीद के साथ घंटों खड़े रहे। दो दिनों में दो हजार से अधिक लोगों ने कार्यक्रम का लाभ उठाया।
ज्योतिष बड़ा विज्ञान : विजय कौशल
स्कूल में आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि श्रीराम कथा वाचक संत विजय कौशल महाराज ने कहा कि ज्योतिष बड़ा विज्ञान है। ज्योतिष की विदेशों में भी समृद्धि हुई है। हमारे देश के लोगों का ज्योतिष पर अधिक विश्वास है। इसको और बढ़ाया जाना चाहिए। ज्योतिष और संस्कृति में भारत विश्व गुरु है। ज्योतिषाचार्यों के ऐसे सम्मेलनों से जहां ज्योतिष को लाभ होगा वहीं जनता को भी इसका लाभ मिलेगा। आज जरूरत है ऐसे कार्यक्रमों की। उन्होंने ज्योतिषाचार्यों को भी सलाह दी कि वह अपने ज्योतिष गणित को और अधिक मजबूत करें।
ज्योतिषाचार्यों ने ज्योतिष के माध्यम से तमाम गणितीय एवं वैज्ञानिक पहलुओं पर मंथन किया। इस दौरान देश के बड़े नेताओं की कुंडली पर भी मंथन किया गया। विद्यालय के चेयरमैन रामनिवास अग्रवाल सचिव संजय अग्रवाल ने ज्योतिष को महत्वपूर्ण विज्ञान बताया। साथ ही ज्योतिषाचार्य सेमिनार में आए सभी ज्योतिषाचार्यों का आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन पं. शिवराज शर्मा ने किया। कार्यक्रम में ज्योतिषाचार्या के साथ साथ शहर की विभिन्न हस्तियां उपस्थित रहीं।
नासा की टीम भी असमर्थ
ज्योतिषाचार्य पंडित लेखराज शर्मा ने कहा कि ऋषि मुनियों एवं मनीषियों की गणित एवं भविष्यवाणियों के सामने नासा की टीम भी असमर्थ है। उन्होंने कहा कि ज्योतिष पंच तत्व यानी अग्नि, गगन, धरा, पवन, जल पर आधारित है। इन्हीं के आधार पर वास्तु एवं नक्षत्रों की गणना से एकाकार करके जीवन में आने वाली विसंगतियों एवं विपदाओं को जानना एवं उनका निराकरण खोलना है।