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फुलप्रूफ प्लान, सौदेबाज बनी खाकी, मिशन 25 करोड़ 

Sat, 30 Dec 2017 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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 25 करोड़ के पुराने नोट पकड़ने के लिए फुलप्रूफ बना था। मुखबिरी बिल्डर के एक करीबी ने पुलिस से की थी, तो एक दरोगा ने दिल्ली की एक बड़ी कंपनी का मैनेजर बनकर बिल्डर से सौदेबाजी की। वह करीब 10 दिन तक बिल्डर के संपर्क में रहा। 72 घंटे पहले ही बिल्डर ने दरोगा को पुरानी करेंसी दिखाई थी। जिसके बाद से घेराबंदी शुरू हो गई थी। आखिरकार शुक्रवार सुबह मिशन 25 करोड़ फतह हो गया। हालांकि पुलिस करेंसी पकड़ने का जरिया सर्विलांस को बता रही है।
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करीबी मिला सिपाही से
बिल्डर संजीव मित्तल के एक करीबी की मुलाकात एक सिपाही से थी। 25 करोड़ की करेंसी बदलने को लेकर बिल्डर की अक्सर रोजाना किसी न किसी से बातें होती थी। सिपाही ने इसकी सूचना कंकरखेड़े थाने के दरोगा रितेश कुमार को दी। जिसके बाद दरोगा रितेश कुमार दिल्ली की एक कंपनी का मैनेजर बनकर बिल्डर संजीव मित्तल से मिले। 

25 प्रतिशत पर सौदा
25 प्रतिशत के हिसाब से पुराने नोट बदलवाने पर दरोगा और बिल्डर में सौदेबाजी हुई। बिल्डर को भरोसा हुआ तो उसने एक नौकर को भेजकर तीन दिन पहले पुरानी करेंसी दरोगा को दिखा दी। उसके बाद इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा दीपक शर्मा और दरोगा रितेश कुमार ने एसएसपी मंजिल सैनी को इसकी जानकारी देते हुए पुरानी करेंसी बरामद करने के लिए फुलप्रूफ बनाया गया। 
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सुबह ही धमकी टीम
शुक्रवार सुबह सात बजे दरोगा रितेश कुमार दो सिपाहियों को सादी वर्दी में निजी गाड़ी से बिल्डर के पास पहुंचे। चाय नाश्ता कर करीब एक घंटे तक राजकमल एंकलेव के गेट पर बिल्डर ने अपने ऑफिस में बैठकर उनसे बातचीत की। इसके बाद इशारा मिलते ही कंकरखेड़ा इंस्पेक्टर दीपक शर्मा ने कॉलोनी की चारों तरफ से घेराबंदी कर ली। सुबह करीब 11:45 बजे छापा मारा गया। 

इसका मिला फायदा
इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा दीपक शर्मा इससे पहले परतापुर थाने के इंचार्ज रह चुके है। इसलिए उनको कॉलोनी की भौगोलिक स्थिति की पूरी जानकारी थी। पुलिस टीम ने बिल्डर के यहां छापा मारा और 25 करोड़ की करेंसी बरामद कर ली। 

फुलप्रूफ प्लान पर सवाल भी
इस फुलप्रूफ प्लान पर सवाल भी उठने लगे है। बिल्डर के पास पुलिस सुबह से थी तो उसको मौके से क्यों नहीं पकड़ा। आखिर बिल्डर को परिवार के साथ भागने का मौका पुलिस ने क्यों दिया। पुलिस टीम ने एसएसपी को बिल्डर के आलीशान बंगलों के बारे में नहीं बताया। कॉलोनी के लोगों ने बिल्डर का बंगला ऑफिस से चंद कदम दूर बताया तो एसएसपी वहां पैदल ही पहुंच गईं। पुलिस ने बिल्डर का परिवार के साथ दोपहर करीब 1:30 बजे घर से फरार होना बताया।

एसएसपी ने खुद खंगाला बंगला
एसएसपी मंजिल सैनी ने अधीनस्थों के साथ बिल्डर का बंगला खंगाला। करीब आधा घंटा तलाशी लेने के बाद वह निकलीं। एसएसपी ने बताया कि घर में एक नौकरानी और दो नौकर ही मिले। 

वो जो भूरा सा लड़का है
पकड़े गए नरेश अग्रवाल से जब एसएसपी पूछताछ कर रही थीं तो एसएसपी के सामने नरेश बार-बार बोल रहा था कि जिस कंपनी को पैसा जाना था, उस कंपनी का आदमी भी पुलिस ने पकड़ा है। इससे पहले नरेश कुछ बोलता कि इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा ने बोलना शुरू कर दिया। एसएसपी ने दोबारा नरेश से पूछा कि कौन से युवक की बात कर रहे हो, जिस पर नरेश बोला कि वो जो भूरा सा लड़का है। इतना कहते पुलिस समझ गई कि नरेश दरोगा रितेश कुमार की बात कर रहा है। 

सर्विलांस से हुआ भंडाफोड़  
इंस्पेक्टर दीपक शर्मा का दावा है कि दस दिन पहले सर्विलांस के जरिये दिल्ली के एक युवक की कॉल ट्रेस हुई थी। जिसमें दिल्ली की एक कंपनी की बिल्डर संजीव से करेंसी बदलने की बातचीत चल रही थी। उसके बाद पुलिस ने अपना मुखबिर तंत्र लगाया। जिसके जरिये यह सारा भंडाफोड़ हुआ है। बिल्डर का ऑफिस सील कर दिया गया है। बंगले पर भी पहरा लगाया है।

इसलिए खोला था ऑफिस 
पकड़े गए युवकों ने बताया कि बिल्डर ने यह ऑफिस सिर्फ पुरानी करेंसी के लिए खोला था। यहां पर सिर्फ वो लोग आते थेे, जिनको करेंसी देखनी होती थी। कर्मचारियों की ड्यूटी शिफ्ट से लगती थी। बिल्डर इस ऑफिस में कम आता था। वह अपने दूसरे ऑफिस में बैठता था। 
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