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पुण्य मास है कार्तिक मास, दान और स्नान का है बहुत महत्व

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मेरठ। भगवान विष्णु के प्रिय कार्तिक मास की पूर्णिमा आज मंगलवार को मनाई जाएगी। कार्तिक मास पुण्य मास माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान व दान का खास महत्व है।
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इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग में स्नान और दान का संयोग बन रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रालॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार सनातन धर्म के लिए पुण्यकारी मास कहे जाने वाले कार्तिक मास में पूर्णिमा का महत्व ग्रह और नक्षत्र से बढ़ गया है। मंगलवार को भरणी नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ ग्रह गोचरों के शुभ संयोग में कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी। भारतीय संस्कृति में कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन धार्मिक आयोजन, पवित्र नदी में स्नान, पूजन और दान का विधान है। पूर्णिमा तिथि पर स्नान और दान से भगवान विष्णु की अपार कृपा बरसती है।
मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान से पापों से मुक्ति मिलती है। काया निरोगी हो जाती है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इस दिन भगवान विष्णु ने अपना प्रथम अवतार मत्स्य अवतार लिया था। अखंड दीप दान करने से दिव्य कांति की प्राप्ति होती है। साथ ही जातक को धन, यश, कीर्ति में भी लाभ होता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगास्नान के बाद दीप दान करना दस यज्ञों के समान फलदायक होता है। कार्तिक पूर्णिमा देवों की उस दीपावली में शामिल होने का अवसर देती है। जिसके प्रकाश से प्राणी के भीतर छिपी तामसिक वृत्तियों का नाश होता है।
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सूर्योदय से पूर्व जागकर करें स्नान
कार्तिक पूर्णिमा पर सूर्योदय से पूर्व जागकर पवित्र गंगा में स्नान करना चाहिए। अगर पवित्र नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। उसके बाद दो दीपक लक्ष्मीनारायण जी के निमित्त व दो दीपक तुलसी पर व एक दीपक गंगा जी पर जलाकर अन्न दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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